मेरठ। दुनिया छोड़ने के बाद देह किसी के काम आ सके। ऐसे में कुछ लोग अपनी मृत्यु से पहले देह दान का संकल्प लेते हैं। 84 वर्षीय चंद्रप्रभा देवी ने अपने पति और बेटी के साथ वर्षों पहले देहदान करने का फैसला लिया था। चार साल पहले उनके पति ओंकार सिंह के निधन के बाद देहदान की गई थी। अब बृहस्पतिवार को चंद्रप्रभा देवी के निधन के बाद परिजनों ने उनकी देह सुभारती अस्पताल को दान कर दी।
मंगलपांडे नगर निवासी अधिवक्ता ओंकार सिंह के दो बेटी प्रोफेसर नीरा सिंह, पैमिला संधू और बेटे रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल संजय सिंह का भरा पूरा परिवार है। ओंकार सिंह के धेवते वैभव सिरोही मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली में नौकरी करते हैं। 10 साल पहले एक संस्था की तरफ से वहां पर कैंप लगाकर देह दान करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया था। वैभव सिरोही इससे प्रभावित हुए। उन्होंने इसकी जानकारी घर आकर अपने नाना ओंकार सिंह, नानी चंद्रप्रभा देवी और मां प्रोफेसर नीरा सिंह को दी। इसके बाद मेरठ कॉलेज में कार्यरत प्रोफेसर नीरा सिंह, उनके पिता ओंकार सिंह और मां चंद्रप्रभा ने चार साल पहले देह दान करने का संकल्प लिया था। शुक्रवार को चंद्रप्रभा देवी का निधन हो गया। परिजनों ने रीति रिवाज से सुभारती अस्पताल को देह दान कर दी। चंद्रप्रभा देवी की देह दुनिया से जाने के बाद भी मौजूद रहेगी।