छात्रसंघ चुनाव की आहट के बीच शिक्षा के मंदिरों में गुंडागर्दी का माहौल बन चुका है। मेरठ कॉलेज और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बाद बुधवार को एनएएस डिग्री कॉलेज में संघर्ष और फायरिंग हो गई। राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते पुलिस सुबूत होने के बावजूद आरोपियों पर शिकंजा कसने में खुद को बेबस महसूस कर रही है।
कोई भी गंभीर नहीं
मेरठ कॉलेज, सीसीएसयू और एनएएस कॉलेज समेत कई कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव का माहौल बनाया जा रहा है। छात्रसंघ का चुनाव लड़ने वाले छात्र एक-दूसरे गुटों के छात्रों पर मुकदमा दर्ज कराने की हर कोशिश कर रहे हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जानलेवा हमला, फायरिंग जैसी संगीन घटनाएं अब आम बात होती जा रही है। कभी कोई बड़ी घटना न हो जाए, इसको लेकर न तो कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन और न ही पुलिस-प्रशासन गंभीर है।
राजनैतिक हस्तक्षेप बाधा
कॉलेजों और विवि कैंपस में बखेड़ा करने वाले नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। क्योंकि नामजद छात्रों को कुछ भाजपा नेताओं का संरक्षण मिलता है। राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते पुलिस सब कुछ जानते हुए भी कदम खींचकर नए बखेड़े की पटकथा तैयार कर देती है।
पुलिस जिम्मेदार, सुबूत दरकिनार
कॉलेज और कैंपस में मारपीट और फायरिंग करने वाले आरोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद होते हैं। पुलिस इनकी फुटेज कब्जे में लेती है। मुकदमा दर्ज होता है। लेकिन सुबूत हाथ में होने के बावजूद पुलिस दबिश तक नहीं देती। जिसके चलते आरोपी छात्र माहौल खराब करने के लिए दोबारा फायरिंग करते है। एनएएस कॉलेज में बुधवार को हुआ संघर्ष पुलिस की लापरवाही से होना बताया जा रहा है। छात्रसंघ अध्यक्ष तरुण मलिक के पक्ष में सरेआम हमला करने वाले आरोपी 20 दिन पहले सिविल लाइन थाने पहुंचे थे। एसएसआई सतपाल सिंह से समझौते की बात कर रहे थे। इसकी जानकारी अफसरों को लगी तो उन्होंने थाना पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।