चार माह पहले किसानों की फसल की नष्ट, हाईटेंशन भी नहीं हुई शिफ्ट
- हाइवे संख्या 334 में कई जगह हाईटेंशन लाइन बाधा बनी
- न तो लाइन शिफ्टिंग का काम हुआ पूरा और नहीं मुआवजा दिया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। मेरठ बुलंदशहर हाईवे संख्या 334 में कई स्थानों पर बाधा बनी हाईटेंशन लाइन का शिफ्टिंग का कार्य चल रहा है। जिसके लिए एनएचएआई ने चार माह पहले किसानों की फसलों पर ही जेसीबी चलाकर उन्हें नष्ट कर दिया था। लेकिन चार माह बाद भी न तो लाइन शिफ्टिंग का कार्य पूरा हुआ और न ही किसानों की फसलों का मुआवजा दिया गया है। किसान कभी प्रशासनिक अधिकारियों व कभी एनएचएआई के चक्कर काट रहे हैं।
राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 334 के निर्माण में कई जगहों पर हाईटेंशन लाइन बाधा बनी हुई है। जिसमें हापुड़ के गांव असौड़ा में दो लाइन, गांव कैली में एक लाइन व खरखौदा में दो लाइन के नीचे से हाईवे का निर्माण किया गया। लाइन नीची पड़ गईं जिस कारण उन लाइनों के नीचे निर्माण कार्य बाधित हो गया। कैली व असौड़ा में तो जहां से लाइन गुजर रही है वहां हाईवे का निर्माण कार्य अभी तक भी रुका पड़ा है। इस सभी स्थानों पर बडे़ पोलों का निर्माण होना है तथा पुराने पोल समाप्त होने हैं। इन पोल का निर्माण एनएचएआई को ही करना है लेकिन निर्माण पावर ग्रिड की देखरेख में होना है। जिसके लिए पहले किसान एनएचएआई से सर्किल रेट का चार गुने मुआवजे को अडे़ रहे, लेकिन एनएचएआई ने पवार ग्रिड, प्रशासन व पुलिस ने मिलकर किसानों पर दबाव बनाकर सर्किल रेट के 85 प्रतिशत पर तय कर लिया। जिसमें किसानों ने कार्य पूर्ण होने से पहले जमीन व नष्ट फसल के मुआवजे की मांग की थी। वहीं, जमीन अधिग्रहण करते समय प्रशासन ने केवल तीन माह में कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया था तथा निर्माण कार्य के दौरान ऊबड़ खाबड़ कृषि भूमि को समतल कराने का वादा भी किया था। वहीं निर्माण कंपनी निर्माण कार्य को बीच में ही छोड़कर भाग गई। पिछले चार माह से किसानों की उक्त जमीनें ऊबड़ खाबड़ हुई पड़ी हैं। अब किसान प्रशासन व एनएचआई के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन न तो उनको फसलों का मुआवजा मिला है और न ही जमीनें समतल हुई हैं। इस मामले में जब एनएचएआई के परियोजना निदेशक डीके चतुर्वेदी से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने अपने आप को किसी मीटिंग में व्यस्त बताया।