सेंट्रल मार्केट में धरने पर बैठी महिलाएं।
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शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट के मामले में पुलिस प्रशासन की टीम के अनुरोध करने के बावजूद महिलाओं का धरना तो अब भी खत्म नहीं हुआ है, मगर अब 815 भूखंड स्वामियों को अवैध निर्माण ध्वस्त करने के नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसकी भनक से स्थानीय व्यापारियों में खलबली मची हुई है। उनका कहना है कि सेटबैक सहित अन्य मामलों में राहत देने से पहले आगे की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं, धरने पर बैठीं महिलाओं का कहना है कि उन पर दबाव बनाने के लिए मुकदमे कायम करने तक की धमकियां लगातार दी जा रही हैं।
सीलिंग की कार्रवाई के बाद से सेंट्रल मार्केट मामले में लगातार धरना चल रहा है। महिलाओं को धरने से उठाने के लिए पुलिस प्रशासन की टीम भी लगातार अनुरोध कर चुकी है मगर महिलाएं उठने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक उनके परिवार और कारोबार की सुरक्षा तय नहीं होगी तब तक वे धरना जारी रखेंगी। महिलाएं चेतावनी दे चुकी हैं कि दो दिन में सांसद, विधायक, महापौर या अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई सुध न ली गई तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगी।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के भूखंड संख्या 661-6 पर बनी 22 दुकानों के कॉम्प्लेक्स पर आवास विकास ने बुलडोजर चलाकर कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद 44 भूखंडों पर सीलिंग की कार्रवाई हो चुकी है। इनमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मंडप सहित अन्य बड़े प्रतिष्ठान भी शामिल रहे। इसी दिन से सेंट्रल मार्केट की 70 प्रतिशत दुकानें बंद हो गई हैं।
आवास विकास परिषद की कार्रवाई के विरोध के साथ ही छोटे और मध्यम भूखंडों में सेटबैक के मानकों में राहत देने की मांग की जा रही है। शास्त्रीनगर के साथ ही जागृति विहार, माधवपुरम समेत आवास विकास की अन्य आवासीय योजनाओं के परिवारों की भी नींद उड़ी है। सोमवार को भी धरने के दौरान व्यापारियों ने बताया कि अब मंगलवार रात प्रभावित परिवार बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिए दिए जाएंगे नोटिस
एक-दो दिन में ही बचे हुए दुकानदारों को अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 दिन में दुकानदारों को स्वयं अपना अवैध निर्माण ध्वस्त करना होगा। इसके बाद जिला प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। कोर्ट के आदेश पर आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर 44 निर्माण सील किए जा चुके हैं।
- अनिल कुमार सिंह, उप आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद।