फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को नहीं मिलेगी बहुत ज्यादा राहत

विज्ञापन
विज्ञापन
- भवन निर्माण एवं विकास उप विधि 2025 को कैबिनेट ने दे दी है मंजूरी
विज्ञापन

- आवासीय भवनों में व्यवसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट जारी कर चुका है ध्वस्तीकरण के आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भवन निर्माण एवं विकास उप विधि 2025 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसमें आवासीय के साथ ही व्यावसायिक गतिविधि में राहत दी गई है। आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी और आर्किटेक्ट के मुताबिक सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों को बहुत ज्यादा राहत नहीं मिलेगी। इसकी बड़ी वजह है कि सेंट्रल मार्केट में भू उपयोग परिवर्तन के मामले सबसे ज्यादा हैं जिसके तहत उपविधि में बहुत अधिक बदलाव नहीं किया गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 661/6 मामले में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हुए हैं। व्यापारियों की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सभी याचिकाएं भी रद्द की जा चुकी हैं। आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर स्कीम संख्या 7 के तहत ही सेंट्रल मार्केट आता है। इसमें सेक्टर-2 व सेक्टर-6 का मुख्य मार्ग मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट माना जाता है। आवास विकास की रिपोर्टर के मुताबिक इस स्कीम में 6379 स्वीकृत आवासीय संपत्तियां हैं। इनमें से 860 संपत्ति ऐसी हैं, जिनमें व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है।
विज्ञापन

सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में कॉम्पलेक्स बन गए हैं और सराफा, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, मर्चेंट स्टोर आदि हैं। कई लोगों ने क्षेत्र में निचले तल पर शोरूम बना लिए हैं और ऊपरी तल पर रिहाइश हो रही है। विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए 1.66 करोड़ का टेंडर भी हो चुका है। तीन बार एक ही कंपनी के टेंडर डालने के बाद शासन से अनुमति ली गई है। इससे व्यापारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। अब कैबिनेट के भवन निर्माण एवं विकास उप विधि को मंजूर दिए जाने के बाद भी सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को खास राहत मिलती नजर नहीं आ रही। आवास विकास अधिकारियों का कहना है कि सेंट्रल मार्केट में आवास से भावनाओं में व्यवसायिक गतिविधि करते हुए शोरूम खड़े कर दिए गए हैं, जिनमें राहत नहीं दी जा सकती। अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराया जा रहा है।


सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत

भवन निर्माण एवं विकास उप विधि को मंजूर किए जाने का कोई बहुत ज्यादा असर सेंट्रल मार्केट पर नहीं पड़ेगा। मामले में सरकार को सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को राहत देने के लिए हस्तक्षेप करने की जरूरत है। राज्यसभा सांसद डॉक्टर लक्ष्मीकांत वाजपेई से शनिवार को वार्ता होगी। इसके बाद रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।
- किशोर वाधवा, व्यापारी नेता सेंट्रल मार्केट।


सेंट्रल मार्केट में सुनियोजित विकास की दरकार

शहर तेजी से बढ़ रहा है। काली नदी से भी दूर तक कॉलोनियां बस गई है। ऐसे में सेंट्रल मार्केट शहर का केंद्र बन गया है। भवन निर्माण एवं विकास उप विधि से इन व्यापारियों को बहुत ज्यादा राहत नहीं दिखती। बहुत जरूरी है कि सेंट्रल मार्केट में सुनियोजित विकास किया जाए। व्यापारियों को राहत के साथ ही बाजार भी चमके।
- वसीम अहमद, आर्किटेक्ट


शमन कराने में ही मिलेगी थोड़ी राहत

भवन निर्माण एवं विकास उप विधि में जो छूट दी गई है उसके अंतर्गत आवासीय भवन में कुछ हद तक व्यवसायिक गतिविधि की जा सकती है। ऐसे में शमन कराने में ही व्यापारियों को थोड़ी राहत संभव है। इसके अलावा ऐसे निर्माण जिसमें आवासीय भवन का प्रयोग व्यावसायिक में हो रहा है उन्हें कोई राहत नहीं मिलेगी।
विज्ञापन

- अंकित अग्रवाल, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश आर्किटेक्ट एसोसिएशन।


एक्ट में संशोधन नहीं नया प्रस्ताव बनाया गया

कैबिनेट ने निर्माण को लेकर नया प्रस्ताव बनाया है किसी एक्ट में संशोधन नहीं किया है। सेंट्रल मार्केट का निर्माण किसी भी तरह से योजना से लाभान्वित होने की श्रेणी में नहीं आता। आवासीय योजना में आवासीय भूखंड में व्यावसायिक गतिविधियां नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन है। नीति नियम के विरुद्ध कुछ होता है तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
- लोकेश खुराना, आरटीआई कार्यकर्ता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें