व्यापारियों को दिए गए थे तीन विकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों से मुलाकात कर उन्हें नुकसान से बचाने के लिए तीन विकल्प भी सुझाए थे। पहला विकल्प यह था कि प्रभावित व्यापारी खुद सरकार के साथ मिलकर इस मामले में पक्षकार बनें, ताकि न्यायालय में उनका पक्ष अधिक मजबूती से रखा जा सके।
दूसरे विकल्प में आवास विकास विभाग द्वारा निर्धारित कंपाउंडिंग शुल्क जमा कर नियमों के अनुरूप समाधान खोजने की सलाह दी गई थी, जिससे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोका जा सके।
तीसरे विकल्प के तहत यह प्रस्ताव रखा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को ध्यान में रखते हुए व्यापारी सेंट्रल मार्केट छोड़ने का निर्णय लें और राज्य सरकार की पुनर्वास योजना स्वीकार कर लें। इस योजना के तहत सरकार सभी प्रभावितों के पुनर्वास की जिम्मेदारी लेने को तैयार थी। हालांकि इन तीनों विकल्पों पर व्यापारियों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी और इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया।
पूर्व सरकारों पर अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के आरोप
सेंट्रल मार्केट का यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पिछली जनता दल, सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल में अवैध निर्माणों को नजरअंदाज किया गया और कई मामलों में उन्हें बढ़ावा भी मिला।
खासकर वर्ष 2013 से 2017 के बीच नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर निर्माण होने की बात कही जा रही है। वर्तमान सरकार का कहना है कि अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।