सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सेंट्रल मार्केट की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके लिए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष को बृहस्पतिवार की सुबह 10:30 बजे कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। आवास विकास परिषद के अधिवक्ता ने समय बढ़ाने का आग्रह किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बीती 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छह सप्ताह के भीतर सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। ध्वस्तीकरण की जद में शास्त्रीनगर क्षेत्र के 1468 निर्माण आ रहे हैं जो मूल रूप से आवासीय हैं, लेकिन वर्तमान में वहां शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं। आवास एवं विकास परिषद ने नए सिरे से सर्वे किया है। इसमें फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है। मामले में जिला प्रशासन को भी रिपोर्ट दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन आख्या दाखिल नहीं की गई।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ताओं ने अधिकारियों के चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने की दलील देते हुए समय बढ़ाने की गुहार की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि कुछ प्रदेशों में चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई जिसमें अधिकारियों की ड्यूटी लगी हुई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट कुछ समय बाद दाखिल की जा सकती है। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन की ओर से 27 जनवरी को जारी किए गए आदेश के अनुपालन में विभाग की ओर से कोई कार्रवाई न करने की बात कही गई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथ ने इस पर कहा कि अब तक अनुपालन आख्या क्यों नहीं दाखिल की गई।