सियासी शोशेबाजी के बजाय काम पर ध्यान देने वाले केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु सोमवार को मेरठ आगमन के दौरान थोड़ी जल्दबाजी में नजर आए। स्वागत की औपचारिकताओं से बचने के लिये वह रेंगती ट्रेन से ही उतर पड़े। हालांकि, ट्रेन की रफ्तार बिल्कुल धीमी थी, लेकिन ऐसा करके वह नियम तोड़ने की जद में भी आ गए।
सोमवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु गाजियाबाद-मेरठ-सहारनपुर विद्युतीकरण रेल सेक्शन का लोकार्पण एवं एस्केलेटर व लिफ्ट का शिलान्यास करने मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रेल स्टाफ के साथ भाजपा नेता प्लेटफार्म नंबर एक पर उनका इंतजार कर रहे थे। पूर्वाह्न 11:55 बजे उनकी स्पेशल ट्रेन यहां पहुंची।
ट्रेन रेंग ही रही थी कि वह प्लेटफार्म पर उतर गए। यही नहीं, स्वागत की औपचारिकता के बिना ही वह कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ गए। इसे लेकर स्टेशन पर चर्चाएं होती रहीं। इस बीच, भाजपाइयों ने सफाई दी कि रेल मंत्री ने औपचारिकताओं से बचने के लिये ऐसा किया है। ट्रेन भी रुकने ही वाली थी।
रेल मंत्री को सौंपे ज्ञापन
बिजनौर के भी ध्यानार्थ
मेरठ। रेल मंत्री के मेेेेरठ आगमन पर जनता की तरफ से भले ही कोई उनसे न मिल पाया हो, लेकिन भाजपाइयों ने जमकर ज्ञापन सौंपे। हालांकि इन ज्ञापनों में मांग सभी की एक जैसी थी। ज्ञापन देने वालों में सांसद, दक्षिण विधायक और भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा भी शामिल रहे। इन दोनों के ज्ञापन में वहीं बातें थीं, जो रविवार रात शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी उठा गए थे।
इनके अलावा बिजनौर सांसद कुंवर भारतेंदु के नेतृत्व में हस्तिनापुर के भाजपाई दिनेश खटीक, जगवीर सिंह, अरविंद कुमार, गौरव भाटी, सोमनाथ पपनेजा, सतपाल भाटी, टेकचंद पाहवा और गोपाल शर्मा आदि ने हस्तिनापुर को रेल लाइन से जोड़ने की मांग की।
जिसके तहत बिजनौर से हस्तिनापुर होते हुए मुरादाबाद और दिल्ली तक रेल यात्रा संचालित करने की मांग प्रमुख थी। भाजपा महानगर उपाध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने जनशताब्दी का स्टॉपेज कैंट स्टेशन पर करने की मांग की। कंकरखेड़ा मंडल अध्यक्ष ठा. ओपी सिंह और पूर्वांचल समाज संगठन ने कैंट स्टेशन से काशी विश्वनाथ ट्रेन चलाने की मांग रखी। दिव्यांग जन विकास समिति के अध्यक्ष नितिन माहेश्वरी ने दिव्यांगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने का ज्ञापन दिया।
नहीं करने दी मुलाकात
सुभारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रूद्रांश सिंह दिव्यांगों पर शोध कर चुके हैं। वह कुछ सुझाव लेकर अपनी दिव्यांग माता के साथ शर्मा स्मारक भवन में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मिलने आये थे। लेकिन आयोजकों ने उन्हें नहीं मिलने दिया। रूद्रांश सिंह का कहना था कि ट्रेन में दिव्यांगों को अपर बर्थ पर भी रिजर्वेशन दे दिया जाता है, जो गलत है। इससे उन्हें असुविधा होती है। इसलिए रेलवे को दिव्यांगों के लिए निचली बर्थ ही रिजर्व करनी चाहिए।