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सीसीएसयू के छात्रों ने कुलपति पर लगाया करोड़ों के घोटाले का आरोप

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मेरठ..कंवलजीत..चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सटी की कुलपति संगीता शुक्ल के खिलाफ कमिश्नरी चौराहे पर प्र
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियों और शासन के नियमों की अवहेलना के आरोप लगे हैं। यह आरोप विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और अधिवक्ता आदेश प्रधान ने लगाए हैं। मंगलवार को इस संबंध में एक दर्जन से अधिक छात्र जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री, जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग को शिकायत पत्र सौंपा।
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बता दें कि प्रयागराज महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्तियों, नियम विरुद्ध उत्तर पुस्तिकाओं और प्रयोगात्मक कॉपियों की खरीद, अवैध भवन निर्माण और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामलों का खुलासा हुआ है। कुलपति पर आरोप है कि दिसंबर 2021 में पदभार संभालने के बाद उन्होंने प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया। आदेश प्रधान का कहना है कि ऑडिट में मेरठ विकास प्राधिकरण से बिना मानचित्र स्वीकृति के फार्मेसी विभाग और मूल्यांकन भवन की दो-दो मंजिलों का निर्माण कराया गया, जिस पर 1454 लाख रुपए से अधिक खर्च दिखाया गया। इतना ही नहीं मरम्मत और अनुरक्षण के नाम पर 2022-23 में 11 करोड़ और 2023-24 में 150 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च बिना औचित्य के किया गया। इसके अलावा 39 लाख अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाओं और सात लाख प्रयोगात्मक कॉपियों की खरीद पर 488 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि इनकी कोई मांग नहीं थी।
फर्जी नियुक्तियों का खेल
शिकायत में कुलपति पर नासर और रूबी बनो नामक व्यक्तियों की फर्जी नियुक्ति कर लाखों रुपए के गबन का आरोप हैं। नासर को कुलपति का ड्राइवर और रूबी बनो को लेखा विभाग में कर्मचारी दिखाया गया, जो नियम-विरुद्ध है। इस मामले में थाना मेडिकल में शिकायत दर्ज है और जांच चल रही है।
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छात्रों के साथ विश्वासघात
विश्वविद्यालय में छात्रों को समय पर मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन और ट्रांसक्रिप्ट नहीं दिए जाते, जबकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है। प्रोविजनल डिग्री के लिए 250 रुपए और अर्जेंट डिग्री के लिए 1000 रुपए लिए जाते हैं। पीएचडी प्रवेश परीक्षा भी कई वर्षों से आयोजित नहीं की गई, जिससे लाखों छात्र शोध के अवसरों से वंचित हैं।
सीबीआई-ईडी जांच की मांग
एडवोकेट आदेश प्रधान ने मांग की है कि सीबीआई, ईडी, लोकायुक्त, सीएजी और केंद्रीय सतर्कता आयोग जैसी स्वतंत्र एजेंसियों से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए। 2021-22 से 2024-25 तक के ऑडिट की दोबारा जांच और कुलपति सहित अन्य अधिकारियों का निलंबन करने की मांग की गई है, ताकि जांच प्रभावित न हो।
छात्रों के भविष्य की लड़ाई
यह मामला केवल कुलपति या कुछ अधिकारियों तक सीमित नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर उनकी अवैध संपत्तियां जब्त करने और विश्वविद्यालय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई।
यह रहे मौजूद
अनुज भड़ाना, प्रशांत चौधरी, आकाश भड़ाना, तरुण मलिक, गौरव राणा, केशव गिरी, शशिकांत गौतम, नकुल स्याल, राजिंद्र भाटी, नितिन गर्ग, बॉबी कैलाशपुर, राहुल जाटव, शान मोहम्मद, ललित यादव आदि मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकेश शर्मा का कहना है कि विगत वर्षों में हमारे विश्वविद्यालय ने अकादमिक क्षेत्र की सभी विधाओं में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनका कहना है कि विद्वेषपूर्ण मानसिकता से प्रेरित व्यक्ति विश्वविद्यालय की निरंतर उन्नति को देखकर द्वेषभाव से प्रेरित होकर भ्रामक एवं आधारहीन बयानबाजी कर रहे हैं। यह न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि छात्रों और समाज के मन में भ्रम उत्पन्न करने की एक असफल कोशिश भी है। यह स्पष्ट किया जाता है कि विश्वविद्यालय में सभी शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, अधिनियमों एवं नियमों के अनुरूप पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ संचालित किए जाते हैं।
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