सीसीएसयू की पीएचडी की प्रक्रिया एक महीने से सिर्फ इस वजह से अटकी पड़ी है, क्योंकि खाली सीटों की संख्या पता नहीं है। अधिकारी और कर्मचारी लापरवाह बने हैं। कुलपति के आदेश भी हवा में उड़ा रहे हैं। छात्र पूछने आते हैं तो उन्हें टरका दिया जाता है। कॉलेजों से सूचना मांगने में विवि ने एक महीना लगा दिया। विवि की वेबसाइट पर सोमवार को सर्कुलर आया है कि खाली सीटों की संख्या बताई जाए। विवि जिस रफ्तार से काम कर रहा है उससे नहीं लगता कि अगस्त में भी पीएचडी का कोर्स वर्क शुरू हो पाएंगे।
विवि ने नौ मई को पीएचडी एंट्रेंस टेस्ट कराया था। मई में रिजल्ट घोषित कर दिया। इसके बाद एंट्रेंस से छूट वाले छात्रों से आवेदन मांगे। करीब डेढ़ महीने से प्रक्रिया इसलिए अटकी है, क्योंकि विवि खाली सीटों का पता नहीं लगा पा रहा। एक महीने से विषय वार खाली सीट उपलब्ध कराने का हल्ला मच रहा है। नतीजा अभी तक सिफर है।
सोमवार को डिप्टी रजिस्ट्रार शोध की ओर से शोध केंद्रों और प्रिंसिपलों से उनके यहां तैनात शिक्षकों के अंडर में कितनी सीट खाली हैं, इसकी जानकारी एक सप्ताह के अंदर मांगी है। कुलपति और प्रतिकुलपति कई बार खाली सीटों की संख्या डिप्टी रजिस्ट्रार शोध से मांग चुके हैं। खाली सीट पता नहीं चलने की वजह से प्रक्रिया अटकी पड़ी है।
पीएचडी के लिए बदल सकेंगे यूनिवर्सिटी
यूजीसी ने पीएचडी को लेकर नए नियम बनाए हैं। अब शोधार्थी परेशानी होने पर एक यूनिवर्सिटी से दूसरी यूनिवर्सिटी में पीएचडी का ट्रांसफर करा सकेंगे। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। देश के किसी भी राज्य की यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर हो सकेगा। जानकार इसमें एक तकनीकी अड़चन बता रहे हैं। छह महीने के कोर्स वर्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी यूनिवर्सिटी उसे मानेगी या नहीं। उधर, राजकीय कॉलेजों से पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के सामने शिक्षक के ट्रांसफर होने की समस्या आ रही है। राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों के ट्रांसफर होते रहते हैं।
घर पहुंचेंगे एंट्रेंस के सर्टिफिकेट
विवि पीएचडी एंट्रेंस क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट डाक के माध्यम से उनके घर भेजेगा। सर्टिफिकेट का फारमेट तैयार कर लिया गया है। इस सप्ताह यह काम शुरू हो जाएगा।