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फर्जी मार्कशीट बनाने में बाबू पकड़ा, सस्पेंड

Wed, 16 Dec 2015 11:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू में फर्जी मार्कशीट बनाने का खेल खुलकर समाने आ गया है। बीए एलएलबी की फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में विवि ने गोपनीय विभाग के वरिष्ठ सहायक को पकड़ा है।
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कैंपस की ही बीए एलएलबी की फर्जी मार्कशीट तैयार करने वाले इस बाबू को सस्पेंड कर दिया गया है। फर्जी मार्कशीट जारी करने और पुराने सेमेस्टर की भी फर्जी मार्कशीट बनाने के प्रयास में कार्रवाई की गई है।

मामले की जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी गठित की है। पकड़ में आया यह पहला मामला है। गोपनीय विभाग पर पहले भी सवाल खड़े हुए हैं, लेकिन किसी कर्मचारी पर कार्रवाई पहली बार हुई है।
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गोपनीय विभाग में वरिष्ठ सहायक भानू प्रताप सिसोदिया हैं। भानु प्रताप को एलएलबी की फर्जी मार्कशीट तैयार करने के मामले में विवि ने सस्पेंड किया है। बिना सक्षम अधिकारी के अनुमति के अभिलेखों में छेड़छाड़ करने, बिना सक्षम अधिकारी के मार्कशीट जारी करने और बची हुई मार्कशीट जारी करने का प्रयास करने के मामले में सस्पेंड किया है।

बाबू ने फर्जी मार्कशीट जारी करने के लिए चार्ट भी बदल दिया। सेमेस्टर की दूसरी मार्कशीट भी जारी करने का प्रयास किया। रजिस्ट्रार दीप चंद्र का कहना है बाबू ने फर्जी मार्कशीट जारी की है। अन्य सेमेस्टर की मार्कशीट जारी करने का प्रयास किया है।

आरोपी को सस्पेंड कर जांच समिति गठित की है। फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच कमेटी प्रो. प्रदीप मिश्रा, प्रो. पीके शर्मा और असिस्टेंट रजिस्ट्रार अरुण यादव शामिल हैं।

कंप्यूटर सेंटर पर पकड़ा मामला
मामला कंप्यूटर पर पकड़ा गया। जो फर्जी मार्कशीट तैयार की गई है, वह कैंपस की बीए एलएलबी की 2014 की मार्कशीट है। एक मार्कशीट जारी करने और संशोधित मार्कशीट में पूरे 10 सेमेस्टर की मार्कशीट तैयार करने की योजना थी। फर्जी मार्कशीट पकड़े जाने के बाद गोपनीय विभाग में बदलाव भी होंगे। कुछ ट्रांसफर होने तय हैं। यह भी देखा जाएगा कि फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल हैं।

यह तो बस एक मामला है
गोपनीय विभाग में चार्ट बदलने का खेल पहले भी होता रहा है। फर्जी मार्कशीट जारी करने के मामलों में चार्ट बदले जाते रहे हैं। कार्रवाई पहली बार हुई है। विवि के कुछ कर्मचारी इस खेल में शामिल हैं।

देखना यह भी है कि विवि मामले में एफआईआर दर्ज कराता है या नहीं। फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है तो यह भी देखना होगा कि इससे पहले कितनी फर्जी मार्कशीट जारी हुई हैं। आरोपी बाबू कई साल से गोपनीय विभाग में तैनात है।
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