फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीपीएड, एमपीएड के 44 फीसदी छात्र अवैध  

Thu, 28 Jul 2016 02:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
विज्ञापन
लोगो। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
चौधरी चरण सिंह विवि से संबद्ध बीपीएड और एमपीएड कॉलेजों ने छात्रों को प्रवेश देने में बड़ा खेल कर दिया। सत्र 2013-14 में पात्र छात्रों की जगह सेटिंग कर दूसरे अभ्यर्थियों को दाखिले दे दिए। परीक्षा से पहले विवि ने जांच कराई तो पूरा मामला पकड़ में आ गया। विवि ने वेरीफिकेशन के बाद सही पाये गए छात्रों की परीक्षा कराने के आदेश दे दिए हैं, जबकि अन्य छात्रों की जांच जारी रहेगी।
विज्ञापन


2013-14 में विवि ने सीधे प्रवेश लेने पर कॉलेजों की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। 37 बीपीएड और एमपीएड कॉलेज हाईकोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने विवि को परीक्षा कराने का निर्देश दिया था। विवि ने परीक्षा कराने के लिए कॉलेजों से छात्रों की सूची मांगी। उसके बाद दूसरे छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेजों ने भारी खेल किया है। 2013-14 में जिन छात्रों का दाखिला लिया था, अब उनके स्थान पर नए छात्रों का प्रवेश दिखाकर बीपीएड कराने की तैयारी है। छात्रों की शिकायत पर विवि ने जांच बैठा दी। कमेटी ने कॉलेज की तरफ से 2013 में मिली लिस्ट और वर्तमान लिस्ट से मिलान किया तो बड़ा फर्क नजर आया।
विज्ञापन


1011 छात्रों में से 565 का रिकॉर्ड ही सही मिला। 446 छात्रों के नाम ऐसे हैं जो पहली सूची में नहीं थे। इससे साफ है कि 44 फीसदी से अधिक छात्रों के दाखिले अवैध हैं। इन्हें सेटिंग के जरिये डिग्री दिलाने की तैयारी थी।   

सात कॉलेजों ने नहीं दी जानकारी
विवि ने 37 बीपीएड व एमपीएड कॉलेजों से रिकार्ड मांगा था। चार कॉलेज पहले ही रिकॉर्ड दे चुके थे। अब 33 कॉलेजों को रिकार्ड देना था। इनमें से सात ने रिकार्ड नहीं दिया। 26 कालेजों ने ही जानकारी दी है। पांच कॉलेजों के रिकार्ड में भारी गड़बड़ी मिली है। ये कॉलेज मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद मुजफ्फरनगर और शामली के हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें