एसटीएफ की जांच में यूनिवर्सिटी के दो कर्मचारी चंद्रप्रकाश और श्लेखचंद का नाम मुकदमे में देर रात शामिल कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि यूनिवर्सिटी की जांच में कर्मचारी के नाम आते थे तो उनको हटाया जाता था। दूसरे कर्मचारी को उत्तर पुस्तिका अनुभाग का इंचार्ज बनाया जाता था। लेकिन गिरोह नए इंचार्ज से भी सेटिंग कर उत्तर पुस्तिकाएं बदलवाने का सिलसिला जारी रखता था। आरोपी कर्मचारी पवन को कुछ दिन पहले उत्तर पुस्तिका अनुभाग से हटाया था। जिसकी जगह श्लेखचंद को प्रभारी बनाया था। पवन ने श्लेखचंद से इस गिरोह की बातचीत कराई थी।
गंभीरता से होगी जांच
एसपी एसटीएफ का कहना कि जिन लोगों ने उत्तर पुस्तिकाएं बदलवाकर एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है, उसकी भी गंभीरता से जांच होगी। फर्जी डॉक्टर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते है। पुलिस इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजेगी, ताकि फर्जी डॉक्टरों की पोल खोली जाए। इसके अलावा एलएलबी समेत अन्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होगी।
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