यदि वक्फ बोर्डों की सीबीआई जांच हुई तो मेरठ में कई सौ करोड़ की जमीन की खरीद फरोख्त के राज उजागर होंगे। यहां वक्फ संपत्तियों को धुआंधार तरीके से बेचा गया और सभी में वक्फ बोर्डों की भूमिका संदिग्ध रही। यहां तक कि मेरठ में तो शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया।
केस 1 : पूरा फर्जी खेल
कोतवाली क्षेत्र के इमामबाड़ा निवासी शहजाद अब्बास नकवी का दावा है सन 1939 में उसके दादा मरहूम सैय्यद असगर हुसैन ने नंगलाताशी में करीब 42 बीघा जमीन अपने बेटे करबलाई अब्बास नकवी के नाम से वक्फ की थी। आरोप है कि वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने कागजातों में हेराफेरी कर 15 अप्रैल 2016 को 50 करोड़ की जमीन मात्र 15 करोड़ में बेच दिया। बैनामे के दौरान मात्र 50 लाख रुपए की कीमत दर्शायी गई।
जांच में खुल गया सारा खेल
सीएम के आदेश पर जांच में सामने आ गया कि मुत्तवली जिया अब्बास ने अपने ससुर दानिश अब्बास के साथ मिलकर बेच डाला। कंकरखेड़ा थाने में वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी, इंस्पेक्टर मुंतजिर, जिया अब्बास, अख्तर अब्बास, दानिश अब्बास, अमर इंटरप्राइजेज, अब्दुल वाहिद, मोबीन कुरैशी, गुलाम सैयदेन रिजवी कथित प्रशासनिक अधिकारी वक्फ बोर्ड, उत्सव, राहुल, दस्तावेज लेखक मूलचंद मित्तल तथा सब रजिस्ट्रार चतुर्थ विकास शर्मा के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 में मुकदमा दर्ज किया है।