नोटबंदी के एक माह बाद भी लोगों की समस्याएं अभी कम नहीं हुई हैं। इस बीच बैंकों ने कई बार कैश का फ्लो बढ़ाकर हालात सामान्य करने की कोशिश की। लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी। अलबत्ता इस अवधि में जिले में चार लोगों की मौत हो गई। जिनमें दो बैंक की लाइन में लगे थे तो दो लोगों के परिजनों ने इसका कारण नोटबंदी बताया। जिले के बैंकों में कैश न मिलने को लेकर तोड़फोड़ हो चुकी है।
आठ नवंबर की रात नोट बंदी की घोषणा हुई थी। नौ नवंबर को बैंकों में अवकाश था। 10 नवंबर की सुबह से ही बैंकों में मारामारी शुरू हो गई। लोगों ने अपने घरों के 1000-500 के नोट निकालकर बैंकों में जमा करने शुरू कर दिए। बीस नवंबर तक 3665 करोड़ रुपये जमा हो गए। इस दौरान निकासी केवल 265 करोड़ रुपये की ही हुई। सात दिसंबर तक माना जा रहा है कि जमा धनराशि पांच हजार करोड़ से ज्यादा हो गई है तो लोगों ने 1000 करोड़ से ज्यादा निकाल भी लिए हैं। अभी भी बैंकों में पैसा निकालने के लिए लंबी कतारें हैं। लेकिन कई जगहों पर कैश की स्थिति अच्छी नहीं है। एटीएम के हालात तो और भी खराब हैं।
एटीएम अपडेट, डालने को कैश नहीं
दो हजार और 500 के नए नोट के साइज के हिसाब से उन्हें अपग्रेड करने में ही एक पखवाड़ा बीत गया। जिले में कुल 390 एटीएम हैं। इन सभी को अपडेट करने का दावा बैंक कर रहे हैं। लेकिन इनमें डालने को कैश का ही टोटा है। आरबीआई से बैंकों को अधिकांश दो हजार के ही नोट भेजे जा रहे हैं। 500 के नोट की तो अधिकांश बैंकों ने शक्ल ही नहीं देखी है। हालात यह हैं कि दिल्ली रोड और हापुड़ रोड स्थिति अधिकांश हिस्सों में 90 फीसदी एटीएम में पैसा ही नहीं है।
सहकारी बैंकों का बुरा हाल
किसान पूरी तरह सहकारी बैंकों पर निर्भर रहते हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें खाद बीज, कृषि उपकरण आदि पर सब्सिडी मिल जाती है। इसी वजह से किसान अपने बैंक खाते सहकारी बैंक में ही खुलवाना पसंद करते हैं। मेरठ और बागपत जिले में सहकारी बैंक की 53 शाखाओं में तीन लाख से अधिक किसानों के खाते हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार नोट बंदी के बाद सहकारी बैंकों में 10 से 13 नवंबर तक 1000-500 के कुल 105.11 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इसके बाद आरबीआई ने इस बैंक में बडे़ नोट जमा करने पर रोक लगा दी। दूसरे बैंकों ने भी कैश देने में आनाकानी शुरू कर दी। नतीजा यह हुआ कि नोट बंदी के बाद सहकारी बैंकाें को कुल 18.60 करोड़ रुपये ही अब तक मिल सका है।
कैश मिलने पर समाधान संभव
आरबीआई से फ़्लो में कैश न मिलने की वजह से दिक्कत हुई है। बैंक और प्रशासन स्तर से कैश मंगाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल समस्या का समाधान कब तक होगा, कहना मुश्किल है। फ्लो में कैश आने पर ही समस्या का समाधान संभव है।- अविनाश तांती, लीड बैंक मैनेजर