अवैध कॉलोनियों पर लगाम लगाने के लिए एमडीए ने कमर कसनी शुरू कर दी है। जिन कॉलोनियों के मानचित्र स्वीकृत नहीं हैं, वहां एमडीए की टीम ने बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं कि ‘यह कालोनी अवैध है’। ऐसे में जांच पड़ताल कर ही यहां अपने सपनों का महल खड़ा करने की सोचें।
शहर में अवैध निर्माणों को लेकर लगातार अभियान चलते रहे हैं। लेकिन ऐसे निर्माणों को रोका नहीं जा सका। अहम यह रहा कि कॉलोनियां तक अवैध रूप से विकसित होती चली गईं। इनमें सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों का रहा। सस्ते के लालच में लोगों ने प्लॉट या मकान तो खरीद लिए। लेकिन बाद में परेशानी का सामना करना पड़ा। अब एमडीए ने ऐसे निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए कमर कसी है।
एमडीए के वीसी राजेश कुमार पांडेय ने इस बाबत सभी जोनल प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसी कालोनियों के बाहर बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर स्पष्ट लिखा जाए कि ‘यह कालोनी अवैध है’। इसका तलपट मानचित्र स्वीकृत नहीं है जो रेरा के नियमों का उल्लंघन है। सोमवार को निकली टीम ने एक दर्जन कालोनियों में बोर्ड लगा दिए। शास्त्री कालोनी नूरनगर, अज्ञात कालोनी लिसाड़ी रोड, रहतना के जंगल में बाग काटकर बनाई कॉलोनी, भोला रोड, रुड़की रोड पर आलू गोदाम के पीछे की कॉलोनी, नौचंदी मैदान में डेवलप की जा रही कॉलोनी आदि पर ये बोर्ड लगाए गए हैं। एमडीए के चारों जोन में इस पर काम किया गया।
दर्ज होगा मुकदमा
एमडीए वीसी ने निर्देश दिए हैं कि यदि यह बोर्ड हटाया गया तो कालोनाइजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यदि मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया गया तो कॉलोनी के खिलाफ नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी।
लोगों को भी समझना चाहिए
सोमवार को एमडीए की टीम ने दर्जन भर कॉलोनियों में बोर्ड लगाए हैं। अवैध निर्माणों को लेकर सख्ती की जा रही है। वैसे लोगों को भी यह समझना चाहिए कि वे अवैध कालोनी में भूखंड या आवास न खरीदें। -राजकुमार, सचिव एमडीए
कार्यशाला आयोजित हुई
मेरठ विकास प्राधिकरण के सभागार में सोमवार को एमडीए वीसी राजेश कुमार पांडेय व सचिव राजकुमार की उपस्थिति में एनर्जी कन्जर्वेशन बिल्डिंग के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में एमडीए के सभी अभियंताओं ने भी भाग लिया। कार्यशाला के माध्यम से 2018 की अधिसूचना को भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008 में अंगीकार किये जाने पर चर्चा की गयी। इंजीनियरों को बताया गया कि मुख्य रूप से ग्रुप हाउसिंग के अंतर्गत निर्मित किए जाने वाले आवासीय फ्लैट यदि निजी आवासीय प्रयोजन हेतु प्रयोग किए जाते हैं तो इन भवनों पर यूपी ईसीवीसी कोड 2018 लागू नहीं होगा। मंगलवार को भी दो शिफ्टों में कार्यशाला का आयोजन होगा।