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सावधान : बच्चे का एडमिशन कराने से पहले जरूर पढ़ लें ये खबर

Fri, 16 Feb 2018 11:08 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, वाहिद अली, मेरठ
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प्राइमरी स्कूल
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अपने बच्चे की शैक्षिक नींव मजबूत करने के लिए आप उसका दाखिला जिस प्राइमरी स्कूल में करा रहे हैं तो यह जरूर देख लें कि वह स्कूल बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है भी या नहीं। क्योंकि जिले में 607 प्राइमरी स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। यहां न तो शिक्षा के मानक हैं और न सुविधाएं। कई स्कूल तो घरों में चल रहे हैं। आरटीआई से इसका खुलासा होने पर इसकी शिकायत प्रदेश सरकार से की गई है।

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सरकारी बनाम निजी
सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा, संसाधनों और सुविधाओं का स्तर कितना गिर चुका है, यह सभी के सामने है। कहीं स्कूल किराए के भवन में तो कहीं खंडहर हो चुके सरकारी भवन में चल रहे हैं। कहीं बच्चों से ज्यादा अध्यापक हैं, तो कहीं पूरे स्कूल में एक या दो अध्यापक हैं। ऐसे में अभिभावकों की सोच होती है कि निजी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर होगा तो सुविधाएं भी बेहतर होंगी। लेकिन सावधान हो जाएं क्योंकि यहां भी फर्जीवाड़ा है।

सख्त कार्रवाई कराएंगे
बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार ढाका का कहना है कि गैर मान्यता वाले स्कूल चिह्नित किए गए हैं। कई स्कूलों पर कार्रवाई भी की गई है। सभी गैर मान्यता स्कूलों पर विभाग की नजर है। जिन पर सख्त कार्रवाई होगी।  
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विभाग से मिली यह सूची
सामाजिक संगठन ‘सजग प्रहरी’ के जिलाध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने बेसिक शिक्षा विभाग से आरटीआई द्वारा जिले में अवैध प्राथमिक स्कूलों की सूची मांगी थी। विभाग ने आरटीआई का जवाब देते हुए शहर और ग्रामीण क्षेत्र के कुल 607 प्राथमिक विद्यालयों की सूची थमा दी। जिसमें लिसाड़ी गेट, नौचंदी, ब्रह्मपुरी सहित अन्य क्षेत्रों में ऐसे स्कूल चल रहे हैं।

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प्ले स्कूलों का तो कहीं रिकॉर्ड ही नहीं

स्कूल
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा दी गई इस सूची में वे कई सौ स्कूल शामिल नहीं हैं, जो जिले में बड़ी संख्या में प्ले स्कूल के नाम से संचालित हो रहे हैं। क्योंकि ये प्ले स्कूल विभाग की सूची में शामिल ही नहीं है। वहीं, यह भी बताया गया कि बिना मान्यता के स्कूलों की संख्या एक हजार से ज्यादा है। जबकि सूची में केवल 607 हैं।

जब सब जानते हो तो कार्रवाई क्यों नहीं
सूत्रों की मानें तो इन बिना मान्यता के स्कूलों की कुछ मान्यता प्राप्त स्कूलों से सेटिंग होती है। इसलिए वे बच्चे की टीसी या अंक पत्र ऐसे मान्यता प्राप्त स्कूलों की दिला देते हैं। वहीं, बड़ा सवाल यह भी है कि जब विभाग के पास इन स्कूलों की सूची है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। कुलदीप शर्मा का आरोप है कि जिले में बिना मान्यता के स्कूल बेसिक शिक्षा विभाग की साठगांठ से चल रहे हैं। उन्होंने इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार के ऑनलाइन पोर्टल जन सुनवाई पर की है। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को भी शिकायती पत्र भेजा है।  

बिना मान्यता के स्कूलों में यह नुकसान 
स्कूलों में शिक्षकों का चयन मात्र औपचारिकता होता है। कुछ स्कूलों में शिक्षक अध्यापन की योग्यता ही नहीं रखते हैं। अधिकांश विद्यालयों में बच्चों का बेस मजबूत करने के लिए कोई विशेष प्लान तैयार नहीं किया जाता। सवाल है कि अगर नींव ही कमजोर है जो इमारत कैसे बुलंद होगी क्योंकि यहां बच्चों का भविष्य पूरी तरह से दांव पर है।

मानक
आंकड़ों के अनुसार इन 607 प्राइमरी स्कूलों में एक लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 350 ग्रामीण क्षेत्र में तो 257 नगर क्षेत्र में स्कूल हैं। कहीं 150 तो कहीं 300 तक बच्चे हैं। दरअसल प्राइमरी स्कूल की मान्यता लेने के लिए कई स्तरों पर खरा उतरना होता है। बिना मान्यता वाले स्कूलों में भवन के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बच्चों के लिए खेल का मैदान नहीं होता। प्राथमिक चिकित्सा की बात तो भूल ही जाएं। भवन में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं होते। कई स्कूलों में हादसे हो चुके हैं और बच्चों की जान भी जा चुकी है। कुल मिलाकर बच्चों का भविष्य और जिंदगी दोनों खतरे में होती हैं। ऐसे स्कूलों में प्रवेश से पहले अभिभावकों को सोचने की जरूरत है। जबकि इन स्कूलों में अच्छी खासी फीस वसूली जाती है।

स्कूलों की संख्या
प्राथमिक विद्यालय     930
उच्च प्राथमिक स्कूल  432 
कस्तूरबा गांधी विद्यालय 5
मान्यता प्राप्त निजी   2200
गैर मान्यता प्राप्त स्कूल  607

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