बहसूमा बाईपास स्थित एक स्कूल के सामने शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे कार और बाइक की भिड़ंत हो गई। बाइक सवार तीन छात्रों की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी चलाक कार लेकर फरार हो गया। कस्बा फलावदा के मोहल्ला खारी कुआं निवासी मोहम्मद सलमान (20) पुत्र शाहिद, हाशिम (18) पुत्र नसीमुद्दीन निवासी ग्राम बातनौर तथा हरिप्रकाश (20) पुत्र तोती निवासी ग्राम नंगला हरेरू जेपी एकेडमी में मैनेजमेंट के छात्र थे। तीनों छात्र हाशिम की बाइक पर सवार होकर बहसूमा बाईपास होते हुए मेरठ की ओर जा रहे थे। बाईपास स्थित एक स्कूल के सामने पहुंचे तो अचानक सड़क पर भैंसा-बुग्गी आ गई। उसे बचाने की कोशिश में सामने से आ रही कार ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जब्बरदस्त थी बाइक के परखचे उड़ गए। तीनों छात्र सड़क पर घिसते हुए काफी दूर जा गिरे, इलाज के लिए तीनों छात्रों की चीख पुकार मच गई। इसके बाद चालक कार लेकर भाग निकला, इस बीच बाईपास पर आने जाने वाले लोग भी घायलों की तड़पती आवाज देखकर वहां रूक गये। कंट्रोल रूम की सूचना मिलने पर मवाना इंस्पेक्टर राजेश चतुर्वेदी भी मौके पर पहुंच गये। पुलिस ने तीनों घायलों को एंबुलेंस की मदद से के निजी अस्पताल में भेज दिया। जहां डॉक्टरों ने तीनों छात्रों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने तीनों छात्रों के परिचय पत्र के आधार पर उनके परिजनों को जानकारी दी। इस पर परिजन रोती बिखलती हुई हालत में आनन-फानन में अस्पताल पहुंचे। इंस्पेक्टर मवाना ने बताया कि छात्रों के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। आरोपी कार चालक का कोई सुराग नहीं लगा। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने कहा नहीं पहन रखा था हेलमेट
पुलिस ने बताया कि बाइक पर तीनों छात्र हेलमेट नहीं पहने हुए थे। यदि हेलमेट होता तो जान बच सकती थी। तीनों छात्रों के सिर में गंभीर चोट आना बताया गया है। सिर की गंभीर चोट जानलेवा बन गई। हालांकि जिस समय पुलिस को कंट्रोल रूम पर सूचना दी गई उससे एक्सीडेंट 10 से 15 मिनट पहले होना बताया गया है। मृतक के परिजनों का कहना यदि इलाज जल्दी मिल जाता तो हो सकता है कि जान बच सकती थी। तीनों युवक एक ही बाइक पर थे। रात में अंधेरा भी हादसे का कारण बन गया।
शव देखकर बेहोश हुए परिजन
रात में जैसे ही परिवार के लोगों को एक्सीडेंट का पता चला तो परिवार के लोगों में चीख पुकार मच गई। अस्पताल में परिजनों ने शव देखा तो वह बेहोश हो गये। पुलिस ने किसी तरह परिजनों को संभाला। मृतक सलमान ने के पिता शाहिद ने बताया कि सलमान पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर का था। उन्हें नहीं पता था कि ऐसा दिन भी देखने को मिलेगा, सोचा था कि पढ़ लिखकर जिंदगी संवर जायेगी। लेकिन वह तो जिंदगी से ही चला गया। वहीं, हाशिम के पिता नसीमुद्दीन दूध का व्यापारी है। हरिप्रकाश का पिता तोती मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करता है। रात में घर की महिलाओं का भी रोरोकर बुरा हाल था।