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कैंट में विदेशी परिंदों की ऊंची उड़ान

Sat, 17 Sep 2016 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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‘गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, आसमान में वहीं उड़ेंगे जिनके खुद के पर होंगे’ मशहूर शायर खुर्शीद हैदर का यह शेर मेरठ कैंट क्षेत्र में वास करने वाले परिंदों के लिए मौजूं है। यहां आसमान में परिंदे बेखौफ उड़ते हैं। हवा, दाना और पानी किसी चीज की तंगी नहीं है। कैंट में कहीं पर भी खड़े हो जाइए, आसपास नजर घुमाएंगे तो कुछ परिंदे जरूर नजर आएंगे। कैंट में 288 प्रजाति के पक्षियों का ठिकाना है। इनमें 11 प्रजाति के पक्षी ऐसे हैं जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। इतनी प्रजाति के पक्षी एक जगह पर सेंक्चुरी क्षेत्र के अलावा कहीं नहीं मिलेंगे। विदेशी मेहमानों की भी यहां कमी नहीं है। सर्दी हो या गर्मी माइग्रेटेड बर्ड यहां आती हैं। ब्रीड भी करती हैं।
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सीनियर ऑर्नीथोनलजिस्ट डॉ. रजत भार्गव ने कैंट में पाई जाने वाले पक्षियों पर रिसर्च की है। पता लगाया कि यहां पर कौन-कौन से पक्षी पाए जाते हैं। डॉ. रजत का कहना है कोलकाता कैंट बोर्ड को छोड़कर मेरठ कैंट इलाका देश का सबसे बड़ा कैंटोनमेंट है। यहां कंपनी गार्डन, छठी वाहिनी पीएसी के पास, माल रोड आदि इलाके में बर्ड आसानी से देखी जा सकती हैं। विभिन्न प्रजातियों के हैं। कुछ पक्षी विलुप्त होने वाली प्रजातियों के भी हैं। सर्दी में माइग्रेट बर्ड भी यहां आती हैं। शोभापुर के पास वह देखी जाती हैं।

आती है माइग्रेट बर्ड
गर्मी और सर्दी दोनों सीजन में माइग्रेटेड बर्ड कैंट एरिया में आती हैं। सर्दी में 86 प्रजाति की माइग्रेटेड बर्ड यहां आती हैं। लेकिन यह ब्रीडिंग नहीं करती। गर्मियों में 51 प्रजाति की बर्ड आती हैं। यह ब्रीडिंग भी करती हैं। कैंट का शांत इलाका और तालाब इनको हैबीटेट देता है। बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के मुताबिक विलुप्त होने की कगार में शामिल बर्ड में से 11 प्रकार की मेरठ कैंट में पाई जाती हैं।
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कैंट बना हैबीटेट
पक्षियों के लिए कैंट हैबीटेट है। यहां का शांत इलाका और खाने-पीने की व्यवस्था होने की वजह से पक्षियों के लिए सुविधाजनक है। बड़े तालाब में रामताल वाटिका जैसे तालाब हैं। कैंट क्षेत्र में पेस्टीसाइड यूज नहीं होता। जिस वजह से खाने और पानी से पक्षियों को नुकसान नहीं पहुंचता।

ये हैं पक्षी
कैंट में पाए जाने वाले पक्षियों में सारस क्रेन, पेंटेड स्टार्क, ग्रे हार्न बिल, जार्ज ग्रीन बारगेट, ट्री पाए, हनी बजर्ड, व्हाइट आई, रेड वेंटेड बुलबुल, पोपिल सन बर्ड, गोल्डन ओसिऑल, पाइड कूकू, वुट पेकर आदि शामिल हैं। यहां पांच तरह की मैना हैं। इनमें कॉमन माइना, पाइड माइना, ब्रामनी माइना, बैंक माइना और कॉमन स्टॉर्लिंग। कॉमन स्टॉर्लिंग माइग्रेटेड है।
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यह भी जानें
भारत में 1375 प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं
दुनिया में 10 प्रजाति के पक्षी हैं।
मेरठ में 288 प्रजाति के पक्षी हैं।
28 लुप्त होने की कगार पर हैं।
मेरठ में लुप्त होने वाले 11 हैं।
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