आरआर मॉल ध्वस्तीकरण में चार लोगों की मलबे में दबकर हुई मौत के मामले में कैंट बोर्ड ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। कैंट बोर्ड का दावा है कि उनके ड्रोन और लोगों से मिले वीडियो में दीपक शर्मा माल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान बाहर ही मौजूद था। यह सारे सबूत मजिस्ट्रेट और एसएसपी को भी उपलब्ध कराए गए हैं।
9 जुलाई को मॉल ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया को कैमरों में कैद करने की कैंट बोर्ड ने पूरी योजना बनाई थी। इसके लिए ही बोर्ड ने ड्रोन का इस्तेमाल किया था। साथ ही आसपास खड़े कुछ कैंट कर्मचारियों और अन्य लोगों ने भी अपने मोबाइल आदि से वीडियो बनाई थी। कैंट बोर्ड सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने पत्रकारों के सामने ड्रोन समेत लोगों से प्राप्त कई वीडियो फुटेज और फोटो प्रस्तुत किए। जिसमें उनका दावा है कि माल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले दीपक शर्मा और उनके बेटे हनी उस वक्त घर पर थे। जब कैंट बोर्ड की टीम मॉल को गिराने पहुंची तब दीपक को फोन कर बुलाया गया।
सीईओ का दावा है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान दीपक शर्मा और उनका बेटा हनी बाहर खड़े होकर कार्रवाई को देख रहे थे। ऐसे में उनकी कई लोगों से वार्ता भी हुई। इसके बाद जब वह मॉल के अंदर जाने लगे तो वहां तैनात पुलिस वालों से बहस भी हुई। कैंट बोर्ड का दावा है कि फुटेज में एक व्यक्ति तेजी से मॉल के अंदर घुसते हुए दिखाई दे रहा है। यहीं दीपक शर्मा थे। दीपक के पीछे तीन लोग और एक साथ अंदर घुसे। कैंट बोर्ड का दावा है कि हादसे के बाद जो चर्चा फैली थी कि दीपक, हनी और अन्य तीन लोग दुकान में अंदर सो रहे थे वह पूरी तरह गलत है।
तस्वीरें बता रही हैं कि यह लोग दुकान के अंदर नहीं थे। बल्कि ध्वस्तीकरण के वक्त सुरक्षा घेरा भेदते हुए अंदर घुसे थे। जिस वक्त ये लोग अंदर घुसे तब तक मॉल के पांच पिलर कमजोर हो चुके थे। जैसे ही छठा पिलर कमजोर हुआ तो पूरी बिल्डिंग गिर गई। यह अनुमान किसी को नहीं था जैसे ही यह लोग अंदर घुसेंगे तो माल अगले ही पल गिर जाएगा। सीईओ ने बताया कि कैंट बोर्ड जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। यह सारी वीडियो फुटेज और तस्वीरें मजिस्ट्रेट और एसएसपी को उपलब्ध कराई गई हैं।
पुलिस से हुई दीपक की वार्ता
सीईओ का दावा है कि उनके पास एक वीडियो फुटेज ऐसी भी है। जिसमें दीपक शर्मा की एक पुलिस वाले से वार्ता हुई है। उस पुलिस वाले ने दीपक को बताया था कि मॉल टूटकर ही रहेगा और तुम इससे दूर ही रहो।
लवकुश के परिजनों को सौंपा चेक
सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने मंगलवार को लवकुश के परिजनों को 10 लाख रुपये के चेक दिए। इस मौके पर सदर व्यापार मंडल अध्यक्ष सुनील दुआ भी मौजूद रहे।
बिट्टू को नहीं मिला चेक
हादसे में घायल बिट्टू का भाई मनीष शर्मा मंगलवार को कैंट बोर्ड कार्यालय चेक लेने पहुंचा। लेकिन उसे चेक नहीं मिल सका। मनीष ने बताया कि उसके साथ कैंट बोर्ड कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार किया है। उसे पूरे दिन कैंट बोर्ड कार्यालय में बैठाए रखा, लेकिन सीईओ उनसे नहीं मिले। वहीं उसे कैंट अस्पताल से दवा भी नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि कैंट बोर्ड बिट्टू और परिजनों पर बयान बदलने का दबाव बना रहा है। वहीं सीईओ राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि कैंट बोर्ड सभी मृतक और घायलों की सहायता कर रहा है। चेक देने का फैसला बोर्ड बैठक में तय हुआ था। बिट्टू के परिजन पूरे दस्तावेज लाकर चेक ले सकते हैं।