कैंट क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी से जूझ रहे लाखों लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। भारत सरकार की नई पॉलिसी के तहत अब कैंट क्षेत्र में काऊ के साथ ही स्थायी मोबाइल टावर भी लगाए जा सकेंगे। सब कुछ सही चला तो दिवाली पर लोगों को बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी का तोहफा मिलने की बात कही जा रही है।
यह है बड़ी समस्या
कैंट बोर्ड में करीब एक लाख लोग रहते हैं। यहां मोबाइल टावर नहीं होने की वजह से कनेक्टिविटी की समस्या रहती है। मोबाइल पर बात करते-करते अचानक कॉल कट जाती है। नेट तो चल ही नहीं पाता है। जिसकी वजह से ऑनलाइन पैसे के लेनदेन में भी दिक्कत होती है। इस समस्या से निपटने के लिए कैंट बोर्ड ने जनवरी के पहले सप्ताह में 16 मोबाइल वैन टावर काऊ से कनेक्टिविटी देने की बात कही थी। मोबाइल वैन टावर को लेकर टेंडर निकाले गए थे। कई कंपनियों ने इसकी जानकारी ली। लेकिन रुचि सिर्फ दो ने ही दिखाई थी।
30 जून तक मांगी सूचना
फरवरी में देश के सभी कैंट क्षेत्रों में मोबाइल टावर को लेकर नई पॉलिसी आ गई। जिसके बाद कैंट में काऊ के साथ ही लीज पर डिफेंस की जमीन में स्थायी टावर लगाने को भी हरी झंडी मिल गई। नई पॉलिसी के तहत कैंट बोर्ड ने मोबाइल कंपनियों से ईओवाई मांगी है। इसमें कंपनियों को 30 जून तक ये बताना होगा कि वे किस-किस लोकेशन पर अपने टावर लगाना चाहते हैं। जिससे लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
लीज पर मिलेगी जमीन
कंपनियों द्वारा साइटों के बारे में जानकारी देने के बाद कैंट बोर्ड सीईओ, स्टेशन कमांडर हेडक्वार्टर, सिग्नल कोर, डीईओ और एमईएस के अधिकारी इन साइटों पर विचार करके वहीं या उसके आसपास लीज पर टावर के लिए जमीन मुहैया कराएंगे। स्थायी टावर के अलावा काऊ का भी विकल्प रखा गया है। इसके लिए कैंट बोर्ड दो साल के लिए लाइसेंस देगा। जिसे बाद में बढ़ा दिया जाएगा। स्थायी टावर लगाने के लिए जमीन दस साल के लिए लीज पर दी जाएगी। स्थायी टावर के लिए सबसे पहली प्राथमिकता डिफेंस और कैंट बोर्ड की जमीन की होगी। अगर कंपनी द्वारा कहीं ऐसी साइट चिह्नित की जाती है, जहां पर डिफेंस की जमीन नहीं है तो वहां प्राइवेट प्रॉपर्टी में टावर लगाने जाने का निर्णय भी बोर्ड करेगा। इसको लेकर अब नई पॉलिसी के हिसाब से ही टेंडर निकाले जाएंगे।