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मेरठ : स्वच्छता के प्रहरी ही शहर को कर रहे गंदा

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मेरठ : स्वच्छता के प्रहरी ही शहर को कर रहे गंदा
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मेरठ। स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर में गंदगी के ढेर लगे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, शहर को स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, जो प्रहरी बनकर लोगों को स्वच्छता की शपथ दिला रहे हैं, वे ही शहर को गंदा करने में लगे हैं। हम बात कर रह हैं छावनी परिषद मेरठ की जिसने जेलचुंगी से किला रोड पर अब्दुल्लापुर तक सड़क किनारे और आबूनाला के आसपास कूड़ें के ढेर लगाकर अवैध डंपिंग ग्राउंड बना दिए हैं। आलम यह है कि कूड़े की गंदगी और इससे उठने वाली बदबू के कारण लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।
लोगों ने बताया कि जेलचुंगी से किला रोड पर अब्दुल्लापुर तक सड़क किनारे और आबूनाला के आसपास लगातार कूड़ा डाला जाने से यहां हजारों मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो गया है। बीते दिनों प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और एनजीटी के निर्देश पर बनी ओवरसाइट समिति के सदस्य ने भी मौके का निरीक्षण कर कैंट बोर्ड को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कैंट बोर्ड ने यहां कूड़ा डालना बंद नहीं किया है।
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रोज निकलता है 100 टन कचरा
359 एकड़ क्षेत्र में फैले कैंट में 10 हजार 400 घर हैं। दो हजार दुकानें हैं। सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या मिलाकर 280 हैं। छावनी से प्रतिदिन 100 टन कूड़ा-कचरा निकलता है। कैंट क्षेत्र में इस कूड़े को एकत्र करने के लिए 20 बड़े कचरा घर हैं। इस कचरे को कैंट बोर्ड की गाड़ियां भरकर परीक्षितगढ़ रोड ले जाती हैं। वहां इसे अब्दुल्लापुर में खुले में फेंक दिया जाता है। यह हाल तब है जब कैंट को स्मार्ट कैंट का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद कैंट बोर्ड ने कूड़ा निस्तारण के लिए कोई पहल नहीं की है।
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कई बार लिख चुके हैं पत्र
किला रोड को पूरी तरह गंदा कर दिया है। इसको लेकर हम कई बार कैंट के अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। हम पूर्व में कई बार कूड़े को उठवा भी चुके हैं, लेकिन फिर से छावनी की गाड़ी कूड़ा डाल देती है। - डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, नगरायुक्त।
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