मेरठ। 29.59 करोड़ रुपये की लागत से चालू होने वाला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट आईटीएमएस(इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) बंद हो गया है। आईटीएमएस वाले शहर के नौ प्रमुख चौराहों पर सिग्नल से यातायात चल रहा है, लेकिन वहां एक महीने से ऑनलाइन चालान नहीं हो रहे हैं। इन सभी चौराहों पर फिलहाल कैमरे बंद हैं और नगर निगम स्थित आईटीएमएस कार्यालय में ताला लगा हुआ है, जिस कारण एक महीने में करीब 1.50 करोड़ रुपये का सरकार को फटका लग गया है। निगम अधिकारी इसकी वजह सॉफ्टवेयर का अपडेट होना बता रहे हैं।
राज्य स्मार्ट सिटी मिशन योजना के अंतर्गत मेरठ सहित कई जिलों में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू हुआ था। 24 अप्रैल 2022 को मेरठ शहर के नौ प्रमुख चौराहों पर आईटीएमएस चालू हो गया था। इन सभी चौराहों पर सिग्नल से यातायात व्यवस्था बनी थी। यातायात के नियम तोड़ने पर ऑनलाइन चालान होता था। इस व्यवस्था को नगर निगम और यातायात पुलिस को संयुक्त रूप से चलाना था। आईटीएमएस कार्यालय नगर निगम स्थित दूसरी मंजिल पर है, जहां पर चार ट्रैफिक महिला सिपाही की ड्यूटी रहती थी। इन सभी चौराहों पर यातायात के नियम तोड़ने वालों का आईटीएमएस के जरिये महिला सिपाही रोजाना करीब 800 से ज्यादा चालान ऑनलाइन काटती थीं। यह व्यवस्था नगर निगम और यातायात पुलिस एक साल भी ठीक से नहीं चला सकी। एक महीने से आईटीएमएस बंद पड़ा है। चौराहों पर लगे कैमरे बंद हैं और कार्यालय में ताला लगा दिया गया है। अनुमानत: एक महीने में करीब 1.50 करोड़ का सरकार को फटका लग गया है।
बिगड़ने लगी यातायात व्यवस्था
आईटीएमएस चौराहों पर अभी सिग्नल से यातायात चल रहा है। तीन-चार दिन से पुलिस कंट्रोल रूम में इसकी शिकायतें आ रही थीं कि आईटीएमएस चौराहों पर भी यातायात के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। यातायात सुधरने की बजाय बिगड़ता जा रहा है। शनिवार को अमर उजाला ने आईटीएमएस चौराहों की वास्तविकता देखी, जिसमें पता चला कि सिग्नल वाली लाइट ठीक समय पर यातायात चला रही हैं, लेकिन यातायात के नियम तोड़ने वालों का ऑनलाइन चालान नहीं हो रहा है। नगर निगम स्थित आईटीएमएस कार्यालय पहुंचकर देखा तो वहां पर ताला लगा था।
महीने से बंद है, पैसा जमा नहीं हुआ
आईटीएमएस कार्यालय के बाहर बैठे शुभम नामक युवक ने बताया कि वह निजी कंपनी का कर्मचारी है और एक महीने से आईटीएमएस कार्यालय की देखरेख के लिए ड्यूटी लगी है। आईटीएमएस द्वारा ऑनलाइन चालान का पैसा नगर निगम द्वारा नहीं दिया गया, जिस कारण इस सिस्टम को बंद कर दिया गया। एक महीने से सिस्टम बंद है। कितना पैसा किसको जमा करना है, इस पर युवक ने बताया कि कंपनी के मैनेजर नौशाद हैं, वही सारी बात बता पाएंगे। नौशाद से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन पर बात करने से मना कर दिया।
शहर के यह नौ चौराहे आईटीएमएस
कमिश्नर आवास, जेल चुंगी, गांधी आश्रम, डिग्गी चौराहा, तेजगढ़ी, शास्त्रीनगर एल ब्लाक, ईव्ज चौराहा, हापुड़ अड्डा और बच्चा पार्क।
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सॉफ्टवेयर अपडेट होने के कारण है बंद
जापान की एनईसी नाम की कंपनी द्वारा आईटीएमएस लगा है। यह सिस्टम 4-जी में चल रहा था, जिसको 5-जी में चलाने की प्रक्रिया चल रही है। अभी सॉफ्टवेयर अपडेट हो रहा है, जिसके चलते आईटीएमएस बंद है। चौराहों पर अभी कंपनी द्वारा वाईफाई लगने का काम चल रहा है। ट्रैफिक पुलिस ने आईटीएमएस द्वारा किए गए कार्याें की संतोजजनक रिपोर्ट नहीं दी है। ट्रैफिक पुलिस कंपलीट सर्टिफिकेट(गो लाइव) देंगे। इसके बाद ही निगम द्वारा आईटीएमएस के कार्यों को पूरा माना जाएगा। सभी कार्य पूरे होने के बाद रखरखाव की कीमत भी कंपनी से तय होगी।
अमित कुमार शर्मा, मुख्य अधिशासी अभियंता नगर निगम
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आईटीएमएस से ऑनलाइन चालान
बिना हेलमेट - 1000
लालबर्ती पार करने पर - 500
रॉन्ग साइड से चलने पर - 2000
बाइक पर ट्रिपलिंग करने पर - 2000
सबसे ज्यादा चालान
आईटीएमएस से चालान करने वाली महिला सिपाही का कहना है कि रोजाना 800 चालान करने का टारगेट मिला हुआ था, जिसमें करीब 100 चालान बिना हेलमेट के होते थे। 50 चालान रॉन्ग साइड और बाइक पर ट्रिपलिंग पर होते थे। बाकी 650 चालान लालबत्ती पार करना और जेबरा लाइन पर खड़े वाहनों के होते थे। औसतन रोजाना 5.25 लाख के चालान होते थे। एक महीने में 1.50 करोड़ के चालान आईटीएमएस से होते थे।