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सीएए हिंसा में फंडिंग का मामला: दिल्ली के शाहीन बाग से जुड़ रहे तार, ईडी और एटीएस ने मांगा रिकॉर्ड

Thu, 06 Feb 2020 04:29 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Meerut Violence - फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संसोधन कानून यानी सीएए के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा में फंडिंग कराने वाले चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दिल्ली स्थित ऑफिस तक पुलिस की जांच पहुंच गई है।

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पुलिस ने बताया कि शाहीन बाग में एक संगठन के ऑफिस में पीएफआई ने पैसा डाला था। उस संगठन के जरिए ही दिल्ली से मेरठ में लोगों के खातों में पैसा पहुंचा।

एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि पीएफआई द्वारा संचालित संगठन के शाहीन बाग दिल्ली स्थित कार्यालय की जानकारी जुटा ली गई है।

पीएफआई से जुड़े कई लोग शाहीन बाग में रहते हैं। ईडी और एटीएस ने दिल्ली पुलिस से भी इसका रिकॉर्ड मांगा है। हालांकि अभी मेरठ के बैंकों से रिपोर्ट नहीं मिली है।

यह भी पढ़ें: बड़ा खुलासा: दिल्ली से हुई थी सीएए हिंसा की फंडिंग, पीएफआई के साथ तीन और संगठन थे सक्रिय

भीड़ हिंसा होने की फैलाई थी अफवाह : पीएफआई के जडे़ं पुलिस खंगाल रही है। पुलिस ने बताया है कि जून 2019 में झारखंड में भीड़ हिंसा होने पर पीएफआई ज्यादा सक्रिय हुआ था।

लखनऊ में पीएफआई ने एक धार्मिक स्थल पर पोस्टर लगाकर लोगों को उकसाने का काम किया था। उसके बाद ही पीएफआई ने अपना नेटवर्क बढ़ा लिया था।
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30 जून 2019 को भीड़ हिंसा के विरोध में मेरठ में भी बवाल कराने की साजिश हुई थी। जिसमें युवा सेवा समिति अध्यक्ष बदर अली समेत 35 लोग जेल भेजे थे। अयोध्या प्रकरण और फिर सीएए लागू होने पर 20 दिसंबर 2019 को साजिश के तहत हिंसा की साजिश रची गई। 

एसएसपी ने जारी की सूची
एसएसपी ने बताया है कि पीएफआई से जुड़े 21 आरोपी वसीम, नूरहसन, अब्दुल हाशमी, अमजद, जावेद, मुफ्ती सज्जाद, इरफान मौलाना, शुऐब, कारी ओसामा, डॉ. नूर हसन, मुनीर आलम, नदीम, अनीस खलीफा, अनस, परवेज, मोहसिन कुरैशी, अरमान, अकबर, शहजाद, आस मोहम्मद और मुस्तकीम को जेल भेजा गया है।  मेरठ में पीएफआई से जुड़े 40 लोग रडार पर हैं।
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