वर्षीतप पारणा महोत्सव के अवसर पर श्री श्वेतांबर मंदिर में भगवान की पूजा करते श्रद्धालु स्रोत मं
ऐतिहासिक नगरी के श्री श्वेतांबर तीर्थ क्षेत्र पर चल रहे वर्षीतप पारणा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव पूर्वक भगवान की प्रभावना व पाद प्रक्षाल किया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पारणा महोत्सव में भगवान शांतिनाथ के प्रक्षाल पूजन के पश्चात आदिनाथ भगवान की प्रक्षाल व पूजा, अष्टापद में आदीश्वर भगवान का प्रक्षाल व पूजा, शांतिनाथ मंदिर में पंचकल्याणक पूजा, अष्टापद मंदिर में प्रभावना व पारणा मंदिर में आरती का आयोजन किया गया। इसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। साधार्मिक वात्सल्य साधना बेन, पोपटलाल संघवी आदि रहे।
धर्मसभा में प्रवचन करते हुए आचार्य विजय प्रशमेशप्रभसूरीश्वर महाराज ने कहा कि यह वह पवित्र भूमि है, जहां अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान ने संयम प्राप्त किया था और 400 दिन के उपवास का प्रथम पारणा श्री श्रेयांस कुमार के हाथों से इक्षुरस लेकर इसी स्थान पर किया था। इसलिए जो श्रद्धालु यहां आकर पारणा करते हैं, उन्हें अवश्य ही मोक्ष प्राप्त होता है। हमें इस तीर्थ के दर्शन वंदन कर धर्म लाभ लेना चाहिए।
जैन धर्म में अष्टापद का विशेष महत्व है। यह तीर्थ वैसे तो हमारी आंखों से ओझल है। किंतु हस्तिनापुर तीर्थ क्षेत्र पर विराजमान अष्टापद हैं, जिनके दर्शन मात्र से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। सायंकाल में श्रद्धालुओं ने पारणा मंदिर में आरती कर धर्मलाभ अर्जित किया। महोत्सव को सफल बनाने में प्रधान त्रिलोक चंद जैन, महामंत्री शुभकांत जैन, प्रवीण कुमार जैन, प्रबंधक तेजपाल सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, अतुल कुमार आदि का सहयोग रहा।