बस अड्डों को शहर से बाहर करने के मुद्दे पर मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) आज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपना जवाब पेश करेगा। एमडीए के मुताबिक वह सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए सात हजार वर्ग मीटर जमीन निशुल्क दे चुका है। बाकी जमीन भी महायोजना में रिजर्व है। लेकिन रोडवेज इसे लेने को ही तैयार नहीं है। अहम बात यह है कि एमडीए अधिकारियों ने माना है कि वास्तव में शहर के भीतर चल रहे रोडवेज बस अड्डे प्रदूषण का बड़ा कारण बने हैं और इन्हें बाहर होना ही चाहिए।
भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाने की याचिका पर एनजीटी में सोमवार को सुनवाई होगी। रोडवेज और एमडीए ने इस संबंध में जारी नोटिस पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। हालांकि एमडीए अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जवाब तैयार कर लिया है और एनजीटी में गत दिवस अवकाश होने के कारण जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। सोमवार को जवाब दाखिल करने केे साथ ही एमडीए अपना पक्ष पेश करेगा।
...इसलिए पहुंचा एनजीटी में मामला
शहरवासियों के लिए भैसाली और सोहराबगेट बस अड्डा जाम और प्रदूषण का केंद्र बनकर रह गया है। यहां से चलने वाली बसें न केवल प्रदूषण फैलाती हैं बल्कि शहर में जाम भी लगाती हैं। बस अड्डों को बाहर करने के मामले में एमडीए और रोडवेज एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते आए हैं। दरअसल, बस अड्डे के लिए जमीन एमडीए को मुहैया करानी है और रोडवेज को इसके लिए पहल करनी है। लेकिन न तो रोडवेज शहर से बाहर जाना चाहता है और न ही एमडीए मेरठ महायोजना 2021 के लिए गंभीरता दिखा रहा है। भैसाली बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने में जुटे रोडवेज के कदम उस समय ठिठक गए, जब आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की रिट पर एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अलावा प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी नोटिस जारी कर बस अड्डों को शहर से बाहर करने की योजना के बारे में पूछा। लोकेश खुराना ने बताया कि सोमवार को इस मामले में कोर्ट को सुनवाई करनी है। अभी तक किसी भी विभाग ने नोटिस का जवाब दाखिल नहीं किया है। इस सुनवाई पर सभी की नजर लगी हुई है।
एमडीए ने माना प्रदूषण फैला रहा रोडवेज
एमडीए ने अपने जवाब में यह माना है कि बस अड्डों को शहर से बाहर भेजा जाना निहायत ही जरूरी है। चूंकि एनजीटी ने पूछा है कि बस अड्डों को बाहर करने के लिए एमडीए ने क्या कदम उठाए तो इसका जवाब तैयार किया गया है कि सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए एमडीए लोहियानगर में सात हजार वर्ग मीटर जमीन पहले ही निशुल्क दे चुका है। यहां अभी तक अड्डा नहीं बना है। रोडवेज चाहे तो विभागों में आपसी सामंजस्य कायम कर यहां भी बस अड्डा ले जा सकता है। इसके अलावा मेरठ महायोजना में बस अड्डों के लिए जमीन रिजर्व है। इसके लिए कई बार पत्र रोडवेज अधिकारियों को लिखा जा चुका है। लेकिन अधिकारी सुन नहीं रहे हैं। एमडीए यह जमीन भी देने को तैयार है। लेकिन इसे निशुल्क नहीं दिया जा सकता है।