एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बनी बर्न यूनिट चालू तो हो गई है, लेकिन अभी तक किसी मरीज को यहां भर्ती नहीं किया गया है। इसका लोकार्पण हुए तो एक साल से ज्यादा हो गया है, मगर अभी तक यहां चिकित्सीय स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है और न ही पाइप लाइन से ऑक्सीजन की व्यवस्था हो पाई है।
मेरठ में बर्न यूनिट की मांग दशकों पुरानी है। विक्टोरिया पार्क में साल 2006 में हुए भीषण अग्निकांड में 65 लोगों की मौत हो गई थी, तब अगर बर्न यूनिट होती तो शायद बहुत से लोगों की जान बच जाती। डेढ़ दशक बाद भी स्वास्थ्य विभाग वहीं खड़ा है।
मेडिकल कॉलेज में सामान्य तौर पर हर माह 30 से 35 गंभीर जले हुए मरीज आते हैं। कम जले हुए मरीजों को तो पुराने बर्न वार्ड में भर्ती कर लिया जाता है, मगर गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। इस बर्न यूनिट में पांच बेड की आईसीयू है और 20 बेड का जनरल वार्ड है। इसका लोकार्पण 10 मई 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था, लेकिन अभी तक बर्न यूनिट चालू नहीं हो पाई है।
उपकरण आ गए हैं, पर स्टाफ नहीं मिल सका है। अभी भी गंभीर जले हुए मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इलाज कब से मिलना शुरू होगा, यह अभी साफ नहीं है, पर जल्द शुरू करने का दावा किया जा रहा है। बर्न यूनिट में ओपीडी रूम मरीजों के लिए तैयार है। कमरों में बेड भी बिछा दिए गए हैं और ऑक्सीजन सिलिंडर भी रखे हैं। लिफ्ट भी चालू है। इतना होने के बावजूद मरीजों को अभी इलाज के लिए इंतजार करना होगा। यहां एक स्टाफ नर्स और एक जीएनएम कर्मचारी तैनात है। बाकी स्टाफ और ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछाने की तैयारी है।
भर्ती किए जा सकते हैं मरीज : प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि बर्न यूनिट में मरीज भर्ती किए जा सकते हैं। इतनी व्यवस्था हो गई है। फिलहाल मेडिकल के मौजूदा स्टाफ की मदद ली जाएगी। शासन से स्टाफ और ऑक्सीजन पाइप लाइन के लिए पत्राचार चल रहा है। ऑक्सीजन पाइप लाइन के लिए 30 से 40 लाख रुपये का खर्च आएगा।
जिला अस्पताल की आईसीयू जैसा न हो जाए हाल
जिला अस्पताल में करीब साढ़े चार साल पहले आईसीयू को शुरू करा दिया गया था। बेड डालकर मरीजों को भर्ती किया जाने लगा था, लेकिन स्टाफ न होने के कारण चंद दिन बाद ही उसे बंद कर दिया गया। कुछ समय तक उसमें कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगाई जा रही थी। अब वैक्सीन भी नहीं लग रही, फिलहाल बंद है।