बुलंदशहर-मेरठ मार्ग (एनएच-235) पर काम तेज होने की उम्मीद जग गयी है। काफी दिनों से प्रशासन एनएचएआई को पत्र लिखकर जमीन पर कब्जा लेने के लिए कह रहा था। लेकिन अब एनएचएआई ने प्रशासन से कब्जा लेने की मंशा जताते हुए पत्र लिखा है। इस मार्ग के चौड़ीकरण के लिए मेरठ जनपद के 13 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है।
एनएच-235 को छह लेन का किया जाना है। जिसके लिए काफी लंबे समय से प्रक्रिया चल रही है। एनएचएआई ने मार्ग निर्माण का काम भी शुरू कर दिया है। लेकिन मेरठ जनपद की सीमा में मार्ग का पूरी तरह चौड़ीकरण अभी तक जमीन पर कब्जा न लेने के कारण अटका हुआ है। इस मार्ग के लिए मेरठ जनपद के धीरखेड़ा, कैली, पांची, खरखौदा, नालपुर, बिजौली, फफूंडा, अलीपुर जिजमाना, ढिकौली, हाजीपुर, शाकरपुर, वसीपुर और बढैरा जाहिदपुर के करीब 500 किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ है।
एनएचएआई को इस जमीन के लिए करीब 250 करोड़ रुपये देना है, जिसमें किसानों को दिये जाने वाला मुआवजा और अर्जन व्यय राशि है। एनएचएआई करीब 210 करोड़ रुपये का भुगतान प्रशासन को कर चुका है। जिसमें से 180 करोड़ के आसपास की धनराशि का वितरण हो चुका है। अभी कुछ किसानों को मुआवजा देने के साथ ही अर्जन व्यय राशि बकाया है।
इस शेष धनराशि के भुगतान के साथ ही जमीन पर कब्जा लेने के लिए एडीएम (भूमि अध्यापित) पिछले छह माह से लगातार एनएचएआई को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया था। अब एनएचएआई ने एनएच-235 के लिए भी प्रशासन को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि प्रशासन सुनिश्चित करे कि इस मार्ग की अधिग्रहित हुई जमीन पर किसान फसल न बोएं। इससे साफ है कि एनएचएआई शीघ्र ही कब्जा कार्रवाई कर मार्ग चौड़ीकरण और निर्माण की प्रक्रिया तेज करना चाहता है।