वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया मरीजों को खासा दर्द दे रहा है। दर्द भी ऐसा न लेटे आराम है और न चलते। हाथ-पैरों की सूजन भी जान निकाल रही है। एलोपैथी से जुड़े चिकित्सक के पास मरीजों की जेब खाली हुई और अब दर्द से निजात पाने के लिए मरीज आयुर्वेद की शरण में हैं। लंबे अर्से के बाद आयुर्वेद की तरफ इतने बड़ी संख्या में मरीज जा रहे हैं। चिकित्सकों से लेकर आयुर्वेद के स्टोरों पर मरीजों की भीड़ लगी है।
अगस्त से शुरू हुई इस बीमारी से लोग अब तक परेशान हैं। दर्द से निजात दिलाने के लिए आयुर्वेद की गिलोय वटी, वेदांत वटी से लेकर अन्य औषधियों का इस्तेमाल बढ़ गया है। आलम यह ही कई दवाएं मिल भी नहीं पा रही हैं, जिसमें वेदांत वटी, घना वटी की स्टाक कई बार खत्म हो चुका है। क्योंकि बीमारी से जूझ रहे मरीजों की संख्या अच्छी खासी है, जो बड़ी संख्या में आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग कर रहे हैं। उधर, शहर में कुछ आयुर्वेदिक चिकित्सक ऐसे हैं जिनके पास हर रोज 15 से 20 हजार रुपये की सिर्फ दवाएं मरीजों द्वारा खरीदी जा रही हैं।
दर्द में काफी फायदेमंद
बीमारी का आलम यह है कि अधिकांश आयुर्वेदिक चिकित्सकों के क्लीनिक पर भीड़ है। क्योंकि चिकनगुनिया में बुखार ठीक हो जाने के बाद हाथों, पैरों व घुटनों में दर्द की शिकायत सबसे ज्यादा है। इसमें आयुर्वेद से जुड़ी कुछ खास दवाओं को असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है, जिनके सेवन से मरीजों को दर्द में आराम मिल रहा है।