मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर निर्माण कार्यों ने डासना से लेकर परतापुर तक कुछ रफ्तार पकड़ी है। कई स्थानों पर डामर की रोड आगे बढ़ा दी गई है।इंटरचेंज और आरओबी पर काम इस समय ठप पड़ा है। लेकिन जल्द ही इसे भी तेज किया जाएगा।
एक्सप्रेस वे पर गांव भोजपुर में डामर की सड़क बना दी गई। गांव मुरादाबाद और सोलाना के बीच कुछ किसानों के मुआवजे की बात चल रही है। दरअसल यहां किसानों और प्रशासन के बीच मशक्कत चल रही है। कुछ हिस्सा अधिग्रहण से छूट गया था। वहां अब काम होगा। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद सोलाना और भोजपुर के बीच रुका हुए कार्य को जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाएगा। इधर अब कांशी गांव के पीछे लगभग एक किलोमीटर डामर की सड़क बना दी गई है। एक्सप्रेस वे के बीच रोड़ा बने आम के बाग में लगे पेड़ों को शिफ्ट करके मिट्टी भराव का कार्य जारी है। इसी वर्ष दिसंबर माह में रैपिड ट्रेन का काम मेरठ में शुरू करने की बात कही जा रही है। इससे यह तय है कि दिल्ली से मेरठ का मार्ग बुरी तरह से कुंद हो जाएगा। चुनौती यह है कि इससे पहले मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे को चालू करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो मेरठ से दिल्ली के बीच आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगा।
लगातार कर रहे निरीक्षण
एनएचएआई के अफसरों की मानें तो मई तक कार्य में और गति आएगी। गत माह एनएचएआई के डायरेक्टर टीम के साथ जायजा लेकर गए थे। परतापुर तिराहे पर बन रहे अंडरपास का भी कार्य पूरा होने में अभी दो माह का समय और लग सकता हैं।
निर्माण चिह्नित पर नहीं दिया मुआवजा
परतापुर तिराहे से भूडबराल रजवाहे के बीच बनने वाले गोलचक्कर के मद्देनजर एनएचएआई ने किसानों व व्यापारियों की जमीन व संस्थानों को ध्वस्तीकरण के लिए 60 से अधिक मकानों, होटलों, कारखानों को चिह्नित कर दिया है। लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत किसानों व व्यापारियों को मुआवजा नहीं दिया गया। सभी का कहना है कि मुआवजा मिलने के बाद ही कब्जा दिया जाएगा। दिल्ली की ओर से आने वाले यातायात के लिए परतापुर गांव की ओर से बाईपास को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। वहीं, परतापुर स्थित रेलवे लाइन के पास पिलर बनने का काम भी शुरू हो गया है। जल्द ही परतापुर तिराहे के दूसरी ओर अंडरपास के दूसरे पार्ट की तैयारी की जाएगी। उसके बाद आरओबी से इंटरचेंज पर काम होगा।