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बाढ़ प्रबंधन केंद्र के लिए बजट का सूखा 

Mon, 04 Jul 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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भोला झाल पर बना बाढ़ केंद्र प्रबंधन का भवन। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के एकमात्र बाढ़ नियंत्रण केंद्र को बजट के सूखे ने लील लिया। भोला की झाल पर प्रस्तावित इस केंद्र के निर्माण का काम 10 साल पहले शुरू हुआ था। शासन ने 11 करोड़ रुपये तो दिए, लेकिन उसके बाद चुप्पी साध ली। हाल यह है कि केंद्र ने काम शुरू करना तो दूर इसका निर्माण ही पूरा नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश की ही बात करें तो हर साल बरसात शुरू होने से पहले ही बाढ़ के अंदेशे को लेकर शासन-प्रशासन बेहाल हो जाता है।

बंटवारे में चला गया था एकमात्र केंद्र
उत्तर प्रदेश के बंटवारे से पहले प्रदेश का एक मात्र बाढ़ प्रबंधन, अनुसंधान केंद्र एवं ट्रेनिंग सेंटर रुड़की में हुआ करता था। प्रदेश का विभाजन हुआ तो रुड़की उत्तराखंड में चला गया और बाढ़ प्रबंधन केंद्र भी उत्तराखंड का होकर रह गया।
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लोकार्पण का इंतजार
तत्कालीन सिंचाई मंत्री अनुराधा चौधरी ने वर्ष 2000 में यूपी के एकमात्र बाढ़  प्रबंधन, अनुसंधान एवं ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना मेरठ के भोला झाल पर करने की घोषणा करते हुए शिलान्यास किया था। वर्ष 2006 में इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया हुई और 2007 में निर्माण कार्य शुरू हो गया। लेकिन आज तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। जो निर्माण हुआ, वह देखरेख के अभाव में अब खंडहर में तब्दील होने लगा है। 

बजट के साथ रुका काम
इस निर्माण की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड है। उस वक्त जूनियर इंजीनियर बच्चन पाल इस प्रोजेक्ट को देख रहे थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। उनका कहना है कि इस चौधरी चरण सिंह बाढ़ प्रबंधन, अनुसंधान एवं ट्रेनिंग सेंटर में प्रशासनिक ब्लॉक, लैब, मीटिंग हाल, ट्रेनिंग सेंटर और कमरों सहित स्टाफ के आवास और हॉस्टल का निर्माण होना था। शासन ने कुल मिलाकर करीब 11 करोड़ रुपये दिए, लेकिन उसके बाद बजट ही नहीं मिला, जिसके कारण काम रुक गया।

यह होता फायदा
केंद्र बनने के बाद बाढ़ का पूर्वानुमान और उस पर अंकुश या पूर्व की चेतावनी जारी करने में सुविधा होगी। फिलहाल उत्तर प्रदेश पूरी तरह उत्तराखंड पर निर्भर है। इसलिए प्रदेश ही नहीं, दूसरे राज्यों में भी बाढ़ से तबाही होती रहती है। यदि यह केंद्र चालू हो जाता तो वाटर ट्रीटमेंट का काम भी शुरू हो सकता था। 

कौन देगा मेरे पैसे
अनुसंधान केंद्र के भवन निर्माण के ठेकेदार सतीश मलिक का कहना है कि मेरे अभी तक सात लाख अटके हुए हैं। पैसा न होने के कारण काम बीच में रोक दिया गया। इस जंगल में आधे अधूरे भवन की सुरक्षा के लिए मैं चौकीदार को पेमेंट करता हूं, क्याेंकि असामाजिक तत्व इसे क्षतिग्रस्त करने के साथ ही खिड़की दरवाजे तक उखाड़ ले जाते हैं।

नहीं हुई कहीं सुनवाई
क्षेत्रीय लोगों ने इस अनुसंधान केंद्र को शुरू करने के लिए बहुत मांग उठाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। 11 करोड़ रुपये महज ईंटों के भवन में खपाकर सिस्टम चुप्पी साधकर बैठ गया। कई बार पूर्व सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश और वर्तमान सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव से क्षेत्रीय नेताओं ने मांग रखी, लेकिन किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया।

अब फिर बना बाढ़ का संकट 
मानसून आने के साथ ही पहाड़ों पर बारिश शुरू हो चुकी है। ऐसे में गंगा सहित अन्य नदियों का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस बार मानसून ज्यादा होगा और गंगा में पानी की स्थिति विगत चार पांच वर्षों की अपेक्षा इस बार ज्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे में सिर्फ कागजों में बाढ़ प्रबंधन की कवायद करने वाले प्रशासन और सिंचाई विभाग को इस बार परेशानी हो सकती है। 
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वर्जन
इस मामले की पत्रावली तलब कर देखा जाएगा कि कहां रुकावट है। मेरठ के लिए महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यदि बाधा हट सकती है तो केंद्र चालू कराने का पूरा प्रयास किया जाएगा। - पंकज यादव, डीएम
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