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किसान बनने के लिए बढ़ेगी मारामारी
योजना का लाभ लेने के लिए तहसीलों में मारामारी बढ़ सकती है। असल में पैतृक जमीन मुश्तर के खातों पर रहती है। अधिकतर किसान अलग-अलग जोत नहीं दिखाते। लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए अब जमीन के खातों को खसरा और खतौनी में अलग-अलग दिखाने के लिए भी मारामारी मचने की संभावना है। एक ही घर में कई-कई किसानों के नाम जमीन हो सकती है।
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कब तक के पंजीकृत किसान लिए जाएंगे
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप का कहना है कि बजट में जो प्रावधान किया गया है, उसकी क्या शर्तें होगी यह तो सरकार ही तय करेगी। इसमें जमीन को ही पात्रता माना जाएगा या किसान के पंजीकरण की कोई तिथि ली जाएगी, यह भी देखने वाली बात होगी। जब तक योजना का प्रारूप नहीं आ जाता। पात्रता के विषय में कुछ नहीं कहा जा सकता।
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एक एकड़ में करीब सवा पांच बीघा जमीन
भू-राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर क्षेत्र में जमीन की पैमाइश अलग होती है। बागपत में अधिकतर जगह एक हेक्टेयर में सवा पांच बीघा के करीब जमीन आती है। यानी दो हेक्टेयर में करीब साढ़े दस बीघा जमीन वाले किसानों को लाभ होगा।
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