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सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से बनेगा बुधादित्य योग, आज 16 सितंबर की शाम होगा सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश

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सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से बनेगा बुधादित्य योग, आज 16 सितंबर की शाम होगा सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश
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मेरठ। कोरोना के चलते वर्ष 2020 में सब कुछ बदल गया है। हमारे जीने के तौर-तरीकों से लेकर पूजा-पाठ से जुड़े संयोगों और मुहूर्त तक में बदलाव आया है। चार महीने रहने वाला चतुर्मास इस वर्ष पांच महीने का हो गया है। आमतौर पर श्राद्ध समाप्ति के अगले दिन नवरात्र आरंभ हो जाते थे। इस बार अधिमास के चलते नवरात्र लगभग एक महीने के अंतराल के बाद 17 अक्तूबर से आरंभ होंगे।
ज्योतिष विज्ञान में सूर्य जब एक राशि से निकलकर दूसरी में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति को बेहद अहम माना जाता है। 16 सितंबर को शाम 7:07 मिनट पर नवग्रहों के राजा सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। जिस राशि में सूर्य का प्रवेश होता है उस राशि नाम से जाना जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सूर्य के अश्विन माह में राशि परिवर्तन करने के कारण इसे अश्विन संक्रांति के नाम से जाना जाता है। कन्या राशि में प्रवेश करने से कन्या संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।
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संक्रांति में किए दान का फल अनंत
महर्षि वशिष्ठ ने लिखा कि षडशीति यानि (कन्या, मिथुन, मीन और धनु) तथा विषुवती (तुला और मेष) संक्रांति में दिए दान का फल अनंतगुना, अयन में दिया दान करोड़ गुना, विष्णुपदी में दिए दान का लाख गुना, षडशीति में हजार गुना, चंद्रग्रहण में सौगुना, सूर्यग्रहण में हजार गुना और व्यतीपात योग में दिए दान का अनंत फल होता है।
एक माह एक राशि में रहते हैं सूर्य
सूर्य देव एक राशि में एक माह रहते हैं। सूर्य बीते एक महीने से अपनी राशि सिंह में चल रहे थे। 16 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या में गोचर करेंगे। कन्या राशि में बुध पहले से ही मौजूद हैं। जिस कारण इस राशि में बुध और सूर्य का मिलन होगा और बुधादित्य योग का निर्माण होगा। इस योग के बाद से कन्या राशि पर सूर्य की अद्भुत कृपा होगी और आत्मबल के दम पर वे कई कार्यों को सिद्ध कर पाएंगे।
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सूर्य का कन्यागत होना कनागत
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के समय सूर्य देव कन्या राशि में स्थित होते हैं। इसी पक्ष में कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के कन्यागत होने से ही इन 16 दिनों को कनागत कहा जाता है।
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