लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी मलूक नागर के बजाए कांग्रेस प्रत्याशी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को समर्थन करने वाले पूर्व बसपा विधायक इकबाल ठेकेदार पर गाज गिर गई। इकबाल ठेकेदार को पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण निष्कासित कर दिया गया है।
इकबाल ठेकेदार 2007 और 2012 में बसपा से चांदपुर के विधायक रहे थे। 2017 में वे भाजपा की कमलेश सैनी से चुनाव हार गए थे। वे लोकसभा चुनाव में बिजनौर लोकसभा सीट से पार्टी का टिकट मांग रहे थे। बसपा हाईकमान ने सपा से आई पूर्व विधायक रुचि वीरा को बिजनौर लोकसभा सीट का प्रभारी घोषित कर दिया तो इकबाल ठेकेदार ने उनके खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। उन्होंने रुचि वीरा के खिलाफ लोकसभा क्षेत्र में अनेक जगह प्रदर्शन कराए। तब भी इकबाल ठेकेदार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन बाद में पार्टी में शामिल कर लिया गया।
इसके बाद हाईकमान ने इकबाल ठेकेदार को बिजनौर लोकसभा प्रभारी नियुक्त कर दिया। बिजनौर सीट से चुनाव लड़ने के लिए इकबाल ठेकेदार ने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। उन्होंने चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान ही बसपा ने बिजनौर लोकसभा सीट से मलूक नागर को प्रत्याशी बना दिया।
वहीं इसके बाद से इकबाल ठेकेदार ने संगठन से दूरी बना ली। उन्होंने मलूक नागर का चुनाव नहीं लड़ाया बल्कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी का चुनाव लड़ाया। वे बसपा प्रत्याशी को हराने के लिए खुलकर नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पक्ष में आ गए। हाईकमान को इसकी सूचना दे दी गई थी, लेकिन चुनाव के दौरान किसी तरह के नुकसान से बचने के लिए उन्हें पार्टी से नहीं निकाला गया था। लेकिन अब पार्टी प्रत्याशी का विरोध किए जाने की गाज पूर्व विधायक इकबाल ठेकेदार पर गिर गई है। उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। बसपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने पूर्व विधायक इकबाल ठेकेदार को पार्टी से निष्कासित किए जाने की पुष्टि की है।
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