दानिश का आरोप है कि सीबीसीआईडी टीम उनके चाचा यूनुस की हर बात उन्हें बताया करती थी। यह भी सीबीसीआईडी ने ही उन्हें बताया था कि उन पर जबरन अनस को फंसाने का दबाव बनाया जा रहा है। बाकायदा रुपये की पेशकश भी की गई लेकिन बाद में सीबीसीआईडी ने नकार दिया। दानिश ने बताया कि सीबीसीआईडी ने उनके परिवार के सामने भी कई बार रुपयों का हिंट दिया था। लेकिन वह उनके हिंट को समझ नहीं सके।
शायद यही वजह रही कि बाद में सीबीसीआईडी ने यूनुस के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अनस की गिरफ्तारी से तीन दिन पहले सीबीसीआईडी के अफसरों ने अनस से कहा था कि अगर उसके पास सीबीसीआईडी से कोई फोन आता है तो वह दफ्तर न आए। लेकिन तीन दिन बाद अचानक अनस जब इस मामले की जानकारी लेने सीबीसीआईडी दफ्तर पहुंचा तो उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया गया।
राजनीतिक लाभ के लिए कराई हत्या
दानिश ने यह भी आरोप लगाया कि उसके चाचा यूनुस राजनीतिक लाभ लेना चाहते थे। वह अपने बड़े भाई हाजी अलीम की जगह बुलंदशहर के विधायक बनना चाहते थे। लेकिन यह उनके जीवित रहने तक संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने पहले उनके पिता की हत्या कराई और फिर उनकी संपत्तियों पर भी कब्जा कर लिया। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि अपने भाई के मरने के बाद भी यूनुस ने राजनीति में रुचि दिखाई और उपचुनाव तक में भागीदारी की।
दानिश ने प्रेस के जरिए मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। इसके अलावा परिवार के हर व्यक्ति चाहे वह मरहूम हाजी अलीम के परिवार के सदस्य हैं या फिर उनके चाचा यूनुस के परिवार के सदस्य हैं, सभी का नारको टेस्ट, पॉलीग्राफ़ टेस्ट और लाइ डिटेक्ट टेस्ट कराया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलकर इस मामले की जांच कराए जाने की बात कही है। प्रेस वार्ता में मौजूद रही हाजी अलीम की पत्नी कमर जहां ने भी इस मामले की सीबीआई से जांच कराए जाने का आग्रह किया है। साथ ही यूनुस से अपने परिवार खासकर अपने बेटों की जान का खतरा भी जताया है।
ऐसे काम करती है सीबीसीआईडी टीम
किसी आपराधिक मामले की जांच सीबीसीआईडी को स्थानान्तरित करने का अधिकार प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव गृह को होता है। पीड़ित की द्वारा प्रार्थना पत्र के रुप में पूरी जानकारी मिलने के बादअधिकारी मामले की समीक्षा के बाद जांच सीबीसीआईडी से करने का आदेश कर देते हैं।