सीसीएसयू के कोएड डिग्री कॉलेजों में सत्र दर सत्र लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही हाल रहा तो ट्रेडिशनल कोर्स में लड़के अल्पसंख्यक हो जाएंगे। हो सकता है अगले कुछ सालों में लड़कों के एडमिशन के लिए कोटा तय करना पड़ जाए। शहर के तीनों कोएड कॉलेज मेरठ कॉलेज, डीएन, एनएएस में छात्राओं की संख्या छात्रों से कहीं ज्यादा है। बीएससी और बीकॉम में तो लड़कियों का एक छत्र राज हो गया है।
विवि की एडमिशन कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर वाई विमला का कहना है कोएड कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बढ़ने से वहां का माहौल बेहतर होगा। लड़कियां पढ़ाई को ज्यादा सीरियस ले रही हैं। ट्रेडिशनल कोर्स में तो यही तस्वीर है। प्रोफेशनल कोर्स में तस्वीर उल्टी है। विवि के बीबीए, बीसीए आदि प्रोफेशनल कोर्स में लड़कियों की संख्या आधे से काफी कम है। प्रो. वाई विमला ने बताया कि विवि के अधिकांश छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं। गांवों में प्रोफेशनल कोर्स के लिए परिवार लड़कों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। क्योंकि उसे घर की आय के रूप में देखते हैं। हालांकि कुछ लोग लड़कियों को भी प्रमोट करते हैं, लेकिन यह अनुपात अभी कम है। डीएन डिग्री कॉलेज में तीनों स्ट्रीम में लड़कियां लड़कों की बराबरी पर हैं। हालांकि अन्य कॉलेजों में बीए में छात्रों की संख्या अधिक है।
बड़े कोएड कॉलेज बदल रहे
विवि के बड़े कोएड कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है। इसमें मेरठ कॉलेज हो, गाजियाबाद का एमएमएच कॉलेज, बुलंदशहर का आईपी कॉलेज या एनईआरसी कॉलेज, मुजफ्फरनगर का डीएवी, सीसीआरडी, शामली का आरके कॉलेज, बड़ौत का जनता वैदिक कॉलेज आदि में बीकॉम और बीएससी में छात्राओं की संख्या 50 प्रतिशत या अधिक है। बीएससी बायो और बीकॉम में तो कहीं-कहीं अधिक है।
मेरठ कॉलेज
कोर्स छात्राएं छात्र
बीए 340 520
बीकॉम 336 137
बीएससी बॉयो 311 169
बीएससी मैथ 179 284
बीएससी स्टैट 35 41
एनएस कॉलेज
बीए 112 335
बीएससी मैथ 53 44
बीएससी स्टैट 7 22
डीएन कॉलेज
बीकॉम 261 138
बीएसस बॉयो 166 74
बीएससी मैथ 119 120
बीएससी स्टैट 40 40
एएस कॉलेज मवाना
बीकॉम 42 34
बीएससी बॉयो 64 14
बीएससी मैथ 41 38
(नोट : दाखिले 2016-17 सत्र के हैं।)