बात उन दिनों की है जब 1930 में मेरठ के सुप्रसिद्ध नौचंदी मेले में एक बड़ा जलसा होना था। चूंकि मेले में कई स्थानों के निवासी एक साथ बड़ी संख्या में एकत्रित होने थे। लेकिन अंग्रेजों के एक आदेश ने मेरठ वासियों की नींद उड़ा दी थी।
यह स्थान मेरठ में स्वतंत्रता आंदोलन को तेज करने के लिए बहुत सार्थक था। जब इस जलसे की भनक तत्कालीन प्रशासन को लगी तो तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट व कलक्टर मिस्टर ई.डी. ने जलसा आयोजकों को नोटिस भेजकर चेतावनी दी थी कि यदि मेले में जलसा किया तो बर्तन उठा लिए जाएंगे।
इस नोटिस में लिखा था कि यदि तुम नौचंदी मेले में जलसा करोगे तो यह ब्रिटिश राज के विरुद्ध विद्रोह का काम माना जाएगा और तुम्हारे बर्तन जब्त कर लिए जाएंगे। तुम पर जुर्माना किया जाएगा और छह साल की सजा भी दी जाएगी। वह ऐतिहासिक नोटिस की प्रति आज भी सुरक्षित है।
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