पुलिस ने बताया है कि यह फैक्ट्री परतापुर के जंगल में चल रही थी। किसी को शक न हो, इसलिए दिखावे के लिए यहां बुटीक खोला गया था। लेडीज सूट सलवार की सिलाई का काम बताकर यहां नकली गुटखा और पान मसाला बनाया जाता था। लेडीज कपड़ों की सिलाई सिखाने और रोजगार के नाम पर रणधीर ने लोन भी लेना बताया है। लेकिन करीब एक साल से उसकी आड़ में गुटखा और पान मसाला बनाने का धंधा शुरू कर दिया था।
दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई
पूछताछ में आशीष और मनीष ने बताया कि पुलिस की मिलीभगत से वे चूना, गेरुआ और अन्य चीजें मिलाकर कई बड़े ब्रांड के पान मसाला और गुटखा बना रहे थे। उनके पास विमल, राज दरबार समेत कई ब्रांड और कंपनियों के रैपर बरामद हुए। ये नकली गुटखा और पान मसाला वह दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करते थे। रोजाना 4-5 कार्टून दिल्ली जाते थे। जिसमें करीब 25-30 हजार रुपये की रोजाना कमाई होती थी। कमाई का पैसा पुलिस और अन्य कई जगहों पर भी जाता था। यह कहां-कहां बेचा जा रहा था, इसकी जानकारी पुलिस ने जुटाई है।
एसपी कैंट सतपाल सिंह के अनुसार नकली गुटखा और पान मसाला बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। चार आरोपियों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर परतापुर पुलिस को सौंप दिया है। मुख्य आरोपी रणधीर सिंह की तलाश है।