फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यमुना नदी में डूबी नाव, 19 की मौत के बाद बवाल, देखें तस्वीरें

Sat, 16 Sep 2017 12:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागपत, मदन बालियान

सार

11 लोगों को ग्रामीणों और गोताखोरों ने बचाया, 13 महिलाएं भी मरने वाले 19 लोगों में शामिल, एक गाड़ी में आग लगाई सात वाहनों में तोड़फोड़, 12 पुलिस-स्वास्थ्य विभाग कर्मी पथराव में घायल
विज्ञापन
नदी के किनारे लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बागपत में गांव काठा में बृहस्पतिवार को किसानों और मजदूरों से भरी एक नाव यमुना नदी में डूब गई। नाव में करीब 50 लोग सवार थे, जिनमें से 13 महिलाओं सहित 19 की डूबने से मौत हो गई। 11 लोगों को सकुशल बचा लिया गया। कुछ लोग खुद ही तैरकर बाहर आ गए। एनडीआरएफ की टीम और गोताखोर नदी में डूबे अन्य लोगों की तलाश कर रहे हैं। हादसे के बाद राहत कार्य में देरी से गुस्साए लोगों ने शवों को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। पुलिस ने लाठियां फटकारकर शव उठाने की कोशिश की तो लोग भड़क उठे और पुलिस पर पथराव कर दिया। महिला हेल्पलाइन की गाड़ी में आग लगा दी गई। सात अन्य वाहनों में तोड़फोड़ की गई। बवाल की कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों पर हमला बोल दिया, उनके कैमरे तोड़ दिए। डीएम और अन्य अधिकारियों को भागकर जान बचानी पड़ी। बाद में पुलिस ने रबर बुलेट चलाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पथराव में सीओ और इंस्पेक्टर बागपत सहित एक दर्जन से अधिक पुलिस व स्वास्थ्य विभाग कर्मी घायल हुए हैं।
विज्ञापन

कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार और आईजी रामकुमार ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित लोगों को शांत किया। करीब दो घंटे की मशक्कत और अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीण शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने को तैयार हुए। इस दौरान कमिश्नर और आईजी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि किसी ग्रामीण के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा। हादसा सुबह करीब पौने सात बजे हुआ। नाव में किसान और मजदूर सवार थे, जो खेतों में काम करने के लिए यमुना पार जा रहे थे।  इसके अलावा खाद के बोरे और अन्य सामान भी नाव में लाद लिया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नाव कुछ दूर जाने पर ही डगमगाने लगी और उसमें पानी भर गया। नाव डूबने लगी तो उसमें सवार लोगों में चीख-पुखार मच गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। गांव में धार्मिक स्थलों से एलान कराया गया, कुछ ही देर में सैकड़ों लोग मदद के लिए पहुंचे। जिन 11 लोगों को नदी से सकुशल निकाला गया, उनमें आठ की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें मेरठ और दिल्ली रेफर कर दिया गया। दोपहर तीन बजे तक 19 लोगों के शव  निकाले जा चुके थे, इनमें 13 शव महिलाओं के थे । उधर, नाराज लोगों ने 10 शवों को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। पुलिस ने शवों को जबरन उठाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने विरोध किया। पुलिस ने लाठियां फटकारीं तो ग्रामीण भड़क उठे और पथराव शुरू कर दिया। एसडीएम बागपत की गाड़ी समेत सात वाहनों में तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया। महिला हेल्पलाइन की गाड़ी में आग लगा दी गई। मामले की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को भी भीड़ ने दौड़ा लिया और उनके कैमरे तोड़ दिए। पथराव के बीच डीएम भवानी सिंह खंगारौत सहित अन्य अधिकारियों ने किसी तरह भागकर जान बचाई।
 

केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा विधायकों का विरोध

नदी से शव निकालते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हादसे के करीब चार घंटे बाद मौके पर पहुंचे भाजपा नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मानव संसाधन, नदी विकास राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह, बागपत विधायक योगेश धामा और बड़ौत विधायक केपी मलिक का लोगों ने विरोध किया। लोगों का कहना था कि नदी पार करने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। राहत कार्य देरी से शुरू हुए हैं। डीएम समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी देरी से पहुंचे, राहत कार्य जल्दी शुरू करा दिए जाते तो कई लोगों को बचाया जा सकता था।
सात लोगों की क्षमता वाली नाव में सवार थे 50
बागपत। जिस नाव से किसान-मजदूर यमुना पार कर रहे थे, उसमें करीब 50 लोग सवार थे। नाव की क्षमता बमुश्किल सात लोगों को यमुना पार कराने की है। इसमें खाद के बोरे एवं अन्य कृषि यंत्र भी रख लिए। क्षमता से अधिक वजन हो जाने के कारण कुछ सेकेंड में ही नाव यमुना में समा गई।

चीखते-चिल्लाते यमुना में समा गईं 19 जिंदगियां 

नदी से शव निकालते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नाव धंस गई थी। महिलाओं ने शोर मचाना शुरू किया। पानी भर चुका था, मदद के लिए लोग चिल्लाने लगे। जो तैर सकते थे बाहर निकल आए। किसी ने बल्ली का सहारा लिया, किसी ने तार पकड़ा, किसी ने बांस और किसी ने रस्सी का सहारा। मदद कम पड़ गई और चीखते-चीखते यमुना में जिंदगियां दम तोड़ने लगीं।  
हादसे का दर्द काठा के लोग शायद ही भुला पाएं। नाव से कूदकर बाहर निकले किसान यशवीर बताते हैं कि सवारियां अधिक होने की वजह से नाव डोलने लगी थी। कुछ ही दूर गई तो पानी भरने लगा। नाव धंस गई, जिन्हें तैरना आता था वह बाहर निकल गए। जिसे सहारा मिल गया, उसकी जिंदगी बच गई। मौत से घिरे लोग चीखने लगे तो आसपास के लोग मदद के लिए भी दौड़े, लेकिन मदद करें तो कैसे। मौत के भंवर में कौन कूदे। किसी ने तार फेंका, किसी ने बल्ली तो किसी ने रस्सा, लेकिन 19 जिंदगियों को बचाया नहीं जा सका। गांव में एलान हुआ, जिनके अपने घर से निकले थे वह यमुना के किनारे की तरफ दौड़ पड़े। जब तक गोताखोर और मदद पहुंची देर हो चुकी थी। 

चोटी हाथ लगी तो बच गई जान 

नदी से शव निकालते लोग और लोगों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिला अस्पताल में भर्ती महिला ममता बताती है कि चीख-पुकार मची थी। वह भी डूब गई, एक बार उसे उछाल लगा तो उसके हाथ में पहले किसी का सूट आया, लेकिन छूट गया। दोबारा उछाल से वह बाहर निकली तो उसके हाथ में  किसी की चोटी आ गई। इसी के सहारे ही वह यमुना किनारे तक पहुंची। इसी तरह दूसरी महिला संतोष ने बताया कि उसके हाथ में किसी महिला की चोटी आई, जिसकी वजह से वह बाहर तक निकली। कालू ने बताया कि उसने डूबते समय एक साथी का हाथ पकड़ लिया था। उसने ही उसको यमुना किनारे लगा दिया।  
विज्ञापन

लोगों ने समझाया, लेकिन नहीं माना था नाविक 

शव को ले जाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नाव में भीड़ अधिक हो जाने के कारण लोगों ने नाविक रिजवान को समझाया कि कुछ सवारियां उतार दो, लेकिन वह नहीं माना। सवारियां भरता रहा। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि दो बार नाव लोगों को बैठाने के लिए रोकी गई, नाविक चंद रुपये के लालच में फंस गया। नाव के डगमगाते ही नाविक ने कहा कि नाव डूब रही है। इससे वहां पर चीख-पुकार मच गई। 


होश आते ही पूछा, मेरे बच्चे कैसे हैं? 
जिला अस्पताल में पहुंची ममता ने होश आते ही सबसे पहले बच्चों और परिवार के विषय में पूछा। यहां तीमारदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। 


यमुना पार कराने के लेता था 5 से 10 रुपये  
पीड़ितों का कहना है कि नाविक यमुना पार कराने के लिए रोज आने-जाने वालों से पांच रुपये लेता था। अन्य सवारी से 10 रुपये। नाविक का मकसद एक ही चक्कर में ज्यादा रुपये कमाना था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें