Meerut News: ब्रह्मपुरी में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी। बुधवार को मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। 22 गवाहों ने बयान दिए और 590 दिन बाद सजा सुनाई गई।
सौरभ हत्याकांड: ब्रह्मपुरी के सौरभ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के तीन श्लोकों का जिक्र किया है। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि 163 पेज के आदेश में एक का श्लोक जिक्र करते हुए जिला जज ने कहा कि बाघ है तो जंगल सुरक्षित हैं। इसी तरह कानून है तो मनुष्य सुरक्षित हैं। न्याय का धर्म है अपराधी को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार सजा मिले। उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल ने जो अपराध किया है उसे मृत्युदंड से कम सजा नहीं दी जानी चाहिए।
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सौरभ के वकील।
- फोटो : अमर उजाला
डीजीसी ने बताया कि इस केस में 54 दिन की जांच के बाद पुलिस ने लगभग 1000 पेज का आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 22 गवाहों ने न्यायालय में बयान दर्ज कराए थे। अब 590 दिन बाद दोनों दोषियों को सजा सुनाई गई है। जिला जज ने मृत्युदंड के आदेश में महाभारत के निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥ श्लोक का जिक्र किया। यह श्लोक विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा था।
जिला जज ने आदेश में लिखा है कि सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी के बेहतर भविष्य के लिए लंदन में नौकरी करने गया था। वह वहां से पत्नी को रुपये कमाकर भेजता था। उसकी पत्नी उसे धोखा देकर उसके रुपयों को अपने शौक में खर्च करती थी। उसने पति को धोखा देकर साहिल से संबंध बना लिए। इसके बाद उसकी हत्या की और शव के क्रूरता से टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से चिन दिए। इसके बाद वह हिमाचल प्रदेश घूमने गए और वहां मौज-मस्ती करते रहे।
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बचाव पक्ष की वकील।
- फोटो : अमर उजाला
दोनों बेटियों का हवाला देकर रहम की अपील
बुधवार को जिला जज ने सजा सुनाने से पहले मुस्कान और साहिल से पूछा कि उन्हें कुछ कहना है। तब मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए रहम की अपील की। इस दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकील की लगभग 45 मिनट बहस हुई। बचाव पक्ष ने अपनी दलील में उसके माता-पिता का भी हवाला दिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जेल जाने के बाद अब तक मुस्कान को अपनी बड़ी बेटी या माता-पिता का ख्याल नहीं आया था। अब मौत की सजा के डर से उसे उनका ख्याल आ रहा है।
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मुस्कान और सौरभ। भाई बबलू और मां रेनू।
- फोटो : अमर उजाला
डीजीसी ने कहा कि साहिल शुक्ला की उम्र लगभग 28 वर्ष है। उसकी शिक्षा स्नातक है परंतु वर्तमान में उसका व्यवसाय और आय शून्य है। अभियुक्त मुस्कान रस्तोगी भी लगभग 28 वर्ष की है। उसकी शिक्षा कक्षा 8वीं तक है और उसकी भी आय व रोजगार शून्य है। कहा कि सौरभ की हत्या शातिर और सुनियोजित ढंग से की गई। दोषियों ने सौरभ की हत्या के बाद भी क्रूरता नहीं छोड़ी। उन्होंने मृतक के शव के हाथ कलाई से और सिर धड़ से अलग कर दिए। हत्या के बाद शव को तकिये के कवर में रखकर अपने साथ ले गया था और फिर मुस्कान के घर लाया था।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जेल में रहने के दौरान नहीं दिखा पश्चाताप
डीजीसी ने बताया कि उन्होंने दलील दी कि जेल में डेढ़ वर्ष से अधिक रहने के बावजूद दोनों दोषियों में कोई पश्चाताप नहीं दिखा। उनका आचरण सामान्य रहा। जघन्य कृत्य को लेकर कोई उनमें अपराध बोध नहीं है। वे किसी रचनात्मक या समाजोत्थान के कार्य में संलिप्त नहीं रहे। उनकी मानसिकता खतरनाक और सुनियोजित पाई गई है, जिससे भविष्य में उनके समाज के लिए खतरा न बनने की कोई संभावना नहीं दिखती।
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सौरभ हत्याकांड, साहिल-मुस्कान
- फोटो : अमर उजाला
सु्प्रीम कोर्ट के फैसलों की नजीर की पेश
अभियोजन पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया है। इनमें महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बाबू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धनुंजय चटर्जी, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले शामिल हैं। इन फैसलों में कहा गया है कि ऐसे क्रूर मामलों में कड़ी सजा न्याय के लिए आवश्यक है। दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में मौत की सजा ही सबसे उचित दंड है। इन विधिक व्यवस्थाओं और समाज पर पड़े नकारात्मक प्रभाव का हवाला देते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता ने मृत्युदंड की मांग की है।
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सौरभ और मुस्कान की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
चश्मदीद न होने पर भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से दोषी करार
सौरभ हत्याकांड में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस ने अपनी जांच में जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से केस साबित किया। बुधवार को न्यायालय ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया। इस केस में चश्मदीद गवाह नहीं था। 22 गवाहों के बयान, डिजिटल व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी जोड़कर कोर्ट में पेश की गई। गवाहों और बयानों की कड़ी न टूटने पर दोनों को दोषी करार दिया गया।
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सौरभ और मुस्कान की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
मनाली, शिमला और कसौल के होटल मैनेजरों ने सीसीटीवी फुटेज और रजिस्टर एंट्री से आरोपियों के ठहरने की पुष्टि की। उस दौरान उनके डांस करते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। जांच अधिकारी ने मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम और सीमेंट विक्रेता के बयान दर्ज कराकर गवाही कराई। टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और टावर लोकेशन रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि 3 मार्च की रात मुस्कान और साहिल के मोबाइल ब्रह्मपुरी स्थित हत्या वाले मकान में थे। सौरभ के दोस्त सौरभ ने साहिल को वारदात की रात सौरभ व मुस्कान के घर जाते देखा था।
बचाव पक्ष की दलीलें
सौरभ हत्याकांड के विचारण के दौरान बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने चश्मदीद गवाह न होने की दलील दी। उन्होंने बुधवार को बचाव में कहा कि मुस्कान की दो बेटिया हैं। उनके माता-पिता बुजुर्ग हैं। इससे पहले सुनवाई के दौरान उन्होंने गवाहों से जिरह करते हुए पूछा कि पड़ोसियों ने सौरभ की चीखें क्यों नहीं सुनीं। ड्रम विक्रेता से बिल या दुकान के फुटेज के बारे में सवाल किए गए। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से शव की अत्यधिक सड़न के कारण मौत के समय में 24 से 36 घंटे के अंतर की संभावना पर पूछा गया। वकील ने कैब ड्राइवर और होटल मैनेजरों से आरोपियों में घबराहट या चोट के निशान न होने पर भी सवाल उठाए।