ब्लॉक प्रमुख चुनाव में हर ब्लॉक का अपना अलग रंग, ढंग और रणनीति रही। लगातार चली मशक्कत के बीच जानी ब्लॉक का चुनाव सबसे ज्यादा महंगा बना तो सरूरपुर ब्लॉक का सबसे सस्ता हुआ। यह बात अलग है कि जो निर्विरोध जीतकर आये, उनके खर्च का आंकड़ा कहीं नहीं आ रहा है।
जानी ब्लॉक का चुनाव सबसे महंगा हुआ तो भारी उतार-चढ़ाव भी नजर आया। कुख्यात भूपेंद्र बाफर ने खुद को ब्लॉक प्रमुख का प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन पर्चा दाखिल नहीं कर पाये। इसके दो कारण अहम रहे। एक तरफ जहां प्रशासन उन्हें ग्राम पंचायत चुनाव में जिला बदर कर चुका था, तो वह अपना संपर्र्क पूरी तरह नहीं कर पाये।
दूसरे उनके करीबी रहे सुशील मूंछ और बदन सिंह बद्दो की नाराजगी भी भूपेंद्र पर भारी पड़ी। मूंछ और बद्दो दोनों ने ही भूपेंद्र से किनारा कर लिया। ऐसे में अकेले पड़े बाफर के लिए बाहर से चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया। बाद में बाफर ने ऋषि राणा को समर्थन दिया तो जाट सदस्यों ने ठाकुर प्रत्याशी को वोट देने से इंकार कर दिया।
दूसरी तरफ वोटों को मैनेज करने में पैसे का सबसे बड़ा योगदान रहा। जानी ब्लॉक में तीन लाख से नौ लाख रुपये तक में वोट की कीमत दी गयी। दोनों तरफ से हुए खर्च पर अगर गौर करें तो तीन करोड़ रुपये से ज्यादा यहां चुनाव पर खर्च हुआ। जबकि अन्य ब्लॉकों में यह खर्च 80 लाख से 2 करोड़ के बीच सिमट गया। लेकिन सबसे सस्ता चुनाव सरूरपुर ब्लॉक में हुआ। यहां पर वोट 25 से 50 हजार रुपये के बीच जुटायी गयी। पूरे चुनाव पर यहां दोनों प्रत्याशियों की तरफ से करीब 50 लाख रुपये ही खर्च हुए।