जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि टीम ने दोनों मतदाताओं से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनका वोट केवल मेरठ में ही दर्ज है। ऐप में दिख रही अतिरिक्त एंट्रियां तकनीकी त्रुटि थीं।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम, पता या लोकेशन को लेकर कोई भी भ्रम हो तो तुरंत बीएलओ या उप निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करें। मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य भी सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है।
उन्होंने दोहराया 'एक मतदाता का एक ही वोट बनेगा।'
इस मामले के सामने आने के बाद बूथ लेवल अधिकारियों से लेकर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। लगातार वोटर लिस्टों की क्रॉस-चेकिंग की जा रही है ताकि किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी मतदाताओं में भ्रम न पैदा करे।