रशीदुपर गढ़ी से लेकर आसपास के इलाके में भाकियू की राजनीति होती है। भाकियू के गढ़ के रास्ते में स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को धकेल दिया गया। अपने गढ़ में भाकियू के नेताओं ने उग्र होकर प्रदेश अध्यक्ष के काफिले को घेरने की कोशिश की।
भाजपा के तमाम नेता मान रहे हैं कि अगर प्रदेश अध्यक्ष झालू मार्ग से बिजनौर होकर आते तो इतना बड़ा बखेड़ा न होता। जलालपुर में मौजूद भाकियू नेता दूर से कोल झंडे दिखाकर शांत हो जाते। रूट बदलवाने की राय किसने दी, किसका इसमें हाथ रहा, ये कोई पत्ते नहीं खोल रहा। इस मामले में पुलिस व एलाआईयू भी पूरी तरह नाकाम रही और भाकियू के इरादों को नहीं भांप सकी।
भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि के मुताबिक ये पूरा बखेड़ा प्रशासन की नाकामी की वजह से हुआ है। प्रशासन ने ही रूट बदलवाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने भाकियू का मुखौटा पहनकर ये हरकत की है। वे ही इस तरह का काम रहे हैं।
विपक्षी दलों का अपना जनाधार तो रहा नहीं। अब वे इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। शासन स्तर पर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई है। प्रदेश अध्यक्ष की नाराजगी को देख इस मामले में अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।