प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के सख्त रुख के बाद पार्टी में सुगबुगाहट
गलत कार्यों में लिप्त पदाधिकारियों की साक्ष्य सहित बनाई जा रही गोपनीय सूची
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भाजपाइयों की पोल अब भाजपाई ही खोलेंगे। सरकार बनने के बाद अनुशासित नजर आ रहे भाजपाई पिछले एक साल से पूरी तरह निरंकुश नजर आ रहे हैं। स्थिति ये है कि जमीन पर कब्जे से लेकर दलाली तक में भाजपाइयों के नाम चर्चा में हैं। एनसीईआरटी की फर्जी किताबों का खुलासा होने के बाद अब भाजपा के भीतर हंगामा मचा है। तमाम उपेक्षित कार्यकर्ताओं ने ऐसे तमाम नेता जो गलत कामों से जुड़े हैं, उनके खिलाफ गोपनीय मोर्चा खोल दिया है।
उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा सरकार में अराजकता का आरोप लगाते हुए भाजपाइयों ने तमाम हंगामे किए थे। साल 2017 में भाजपा की प्रदेश में सरकार आने के बाद कुछ माह लगा कि माहौल सुधर रहा है। इस बीच पार्टी का शीर्ष नेतृत्व साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग गया, जिस पर संगठन स्तर से सख्ती शुरू होने के बाद माहौल फिर से सुधरा नजर आया। लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा के जनप्रतिनिधि हों या फिर पदाधिकारी अधिकांश इस समय आरोपों के घेरे में हैं।
मिट्टी खनन में जहां जनपद के दो जनप्रतिनिधियों पर खुलकर आरोप लग रहे हैं, तो जमीन पर कब्जा करने के आरोप भी जनप्रतिनिधियों पर हैं। यही नहीं, अवैध कमेलों के संचालन में भी साठगांठ की बात भाजपा के अंदर फैल रही है। इन जनप्रतिनिधियों के खास लोग तमाम गलत कामों में लिप्त हैं। शहर में हुक्का बार सहित नशे के कारोबार को जहां राजनैतिक संरक्षण है तो सट्टे की खाईबाड़ी और एमसीएक्स में भाजपाई शामिल बताए जा रहे हैं। थानों की दलाली और मनचाहे थानेदार नियुक्त कराना तो आम बात है। वहीं पार्टी नीति के विरुद्ध् तमाम सरकारी ठेके भी भाजपाई ही कब्जाए हुए हैं।
पहले से चर्चाएं, अब हल्ला मचा
इन सारे मामलों को लेकर पहले से चर्चा रही हैं। लेकिन पिछले दिनों एनसीईआरटी की फर्जी किताबों के प्रकाशन में भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता और कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल से उनका करीब से जुड़ा होना चर्चा बन गया। इसे लेकर विपक्षी दल भी इन दिनों खुलकर हल्ला मचा रहे हैं। इस सबसे भाजपा की कहीं न कहीं तगड़ी किरकिरी हुई है।
वहीं, अब नया मामला भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा का जुड़ गया है। उन पर फैक्टरी पर कब्जा करने का आरोप लगा ह्रै। अपनी फैक्टरी का निर्माण होने के बाद भी वह किराये पर लिए गए भवन को खाली नहीं कर रहे हैं।
प्रदेश महामंत्री संगठन नजर आए सख्त
दो दिन पूर्व मेरठ महानगर की वर्चुअल बैठक में प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के सामने यह मुद्दा उठा। उन्होंने ऐसे तमाम लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसके बाद अब पार्टी कार्यकर्ता अपने स्तर से तमाम साक्ष्य जुटाते हुए रिपोर्ट बनाने में लग गए हैं। पार्टी सूत्रों केे अनुसार जल्दी ही गोपनीय रुप से यह रिपोर्ट प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।