मुजफ्फरनगर सीट पर हार के बाद भारतीय जनता पार्टी में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच की लड़ाई सार्वजनिक हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे पर जमकर हमला कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी ये बात देखने को मिली थी, जिसका खामियाजा संजीव बालियान को उठाना पड़ा। चुनाव के बाद दोनों के बीच का विवाद खुलकर सामने आ गया और दोनों नेता एक दूसरे पर कीचड़ उछालने लगे।
खास बात यह है कि इस विवाद को खत्म करने की कोशिश अभी तक किसी ने नहीं की है और न ही किसी ने मध्यस्थता कराने का प्रयास किया है। अब संजीव बालियान ने संगीत सोम के घर पर हुई प्रेस कांफ्रेंस में पर्चा बांटकर जो उन पर आरोप लगाए गए थे, उसकी जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कर दी है। इस लड़ाई का अंजाम क्या होता है, यह आने वाला समय बताएगा।
ऐसा नहीं है कि इस सीट पर सिर्फ भाजपा में ही आपसी घमासान मचा है, यहां समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले हरेंद्र मलिक और मेरठ के एक प्रभावशाली विधायक के बीच भी तल्खी देखने को मिल रही है। हरेंद्र मलिक का कहना है कि हमारी पार्टी के नेताओं ने अगर भितरघात न किया होता तो हमारा जीत का अंतर एक लाख से ऊपर का होता। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कम से कम सरधना में संगीत सोम की नाराजगी का जितना नफा हुआ था, उसे पार्टी के कुछ नेताओं की भितरघात ने खत्म कर दिया। सरधना से समाजवादी पार्टी को संजीव बालियान के मुकाबले हरेंद्र मलिक को 45 वोट कम मिले थे।
इसी दौरान दलितों में विरोध शुरू हो गया कि अगर दलित का टिकट कटा है तो दलित को ही टिकट मिलना चाहिए। नामांकन के बिल्कुल अंतिम समय में समाजवादी पार्टी ने योगेश वर्मा की पत्नी व मेरठ की पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को अपना प्रत्याशी बना दिया। इसे लेकर अतुल प्रधान ने नाराजगी जाहिर की। कहा जा रहा है कि गुर्जर समाज का जितना वोट समाजवादी पार्टी को मिलना चाहिए थे, वह नहीं मिला। इसी तरह हापुड़ के सपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने किठौर से विधायक शाहिद मंजूर पर सुनीता वर्मा की हार का ठीकरा फोड़ा। हालांकि सपा उम्मीदवार सुनीता वर्मा और उनके पति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
देवव्रत त्यागी ने भी अपनों से जताई थी नाराजगी
मेरठ में सबसे बुरा हाल बहुजन समाज पार्टी का हुआ। 2019 के चुनाव में 5 लाख 81 हजार वोट पाने वाली पार्टी इस चुनाव में 87 हजार वोटों पर सिमट गई। चुनाव के फौरन बाद ही बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने पार्टी के लोगों से अपेक्षित सहयोग न मिलने का आरोप लगाया था। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के नेता अपना बूथ तक नहीं जितवा सके। इसमें याकूब कुरैशी और मुनकाद अली दोनों के बूथ पर बसपा बुरी तरह से हार गई। कुल मिलाकर इस लड़ाई को संबंधित राजनैतिक दल ने समय रहते शांत नहीं किया तो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में कम से मेरठ और उसके आसपास की सीटों पर प्रभाव जरूर पड़ेगा, जिसका खामियाजा किसी न किसी दल को उठाना पड़ेगा।