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निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की परीक्षा

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मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव भाजपा महानगर संगठन की परीक्षा होगा। विपक्ष पहले से मजबूत स्थिति में है। ऐसे में अपनी सरकार होने के बावजूद निगम में उपाध्यक्ष तक न बनवा पाना भाजपा संगठन की क्षमता पर सवाल खड़ा कर रहा है। निगम कार्यकारिणी चुनाव को लेकर भाजपा के साथ महापौर खेमे ने भी लामबंदी शुरू कर दी है। निगम कार्यकारिणी का चुनाव 21 मार्च को होगा।
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नगर निगम कार्यकारिणी में 12 सदस्य चुने जाते हैं। इन्हीं सदस्यों के बीच से उपाध्यक्ष का चुनाव होना है। पिछले चुनाव में भाजपा 12 में से 5 सदस्य निर्वाचित करा पाई थी, जबकि महापौर खेमे से 7 चुने गए थे। भाजपा ने काफी जोर लगाया परंतु न तो निर्णायक सदस्य ही कार्यकारिणी में निर्वाचित करा पाई और न ही उपाध्यक्ष पद पर कब्जा कर पाए।
निवर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। निगम बोर्ड नियमों के अनुसार लॉटरी सिस्टम से निर्वाचित सदस्यों में से छह को बाहर किया गया। जिसमें तीन भाजपा और तीन महापौर खेमे से बाहर हो गए। उक्त रिक्त छह पदों पर अब चुनाव होना है। स्थिति ये है कि वर्तमान में महापौर खेमे से चार और भाजपा के दो सदस्य कार्यकारिणी में हैं।
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तीन सदस्य जिताने में होंगे कामयाब
फिलहाल जो आंकड़ा निकलकर आ रहा है। वह भाजपा के पक्ष में जाता नजर नहीं आ रहा है। 90 में से 89 पार्षदों की वोट डलेंगी। जबकि सांसद, राज्यसभा सदस्य, शहरी क्षेत्र के विधायक और एमएलसी के साथ महापौर का वोट मिलाकर कुल 98 वोट डाले जाएंगे। ऐसे में एक सदस्य को जीत हासिल करने के लिए 16 वोटों की जरूरत होगी। इस आंकड़े के तहत भाजपाई सूत्र 48 वोट अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि विपक्ष का कहना है कि 44 वोट ही भाजपा के पक्ष में हैं। ऐसे में जिस तरह विपक्ष लामबंद है और भाजपा के 48 वोटों के दावे को भी सही मान लें तो भाजपा पिछले पांच के आंकड़े को ही छू पाएगी। जो फिर से उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के लिए मुसीबत बनेगा।
प्रदेश में सरकार फिर भी कमजोर
नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव को लेकर सभी की निगाहें भाजपा संगठन पर टिक गई हैं। महापौर सुनीता वर्मा के पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा भी निगम की पूरी स्थिति को अपने पक्ष में रखना चाहते हैं। ऐसे में उपाध्यक्ष वह अपने खेमे से ही बनाना चाहेंगे। भाजपा के खिलाफ पूरा विपक्ष भी एकजुट है। ऐसे में किस रणनीति के तहत भाजपा इस चुनाव में अपना वर्चस्व बनाएगी। इसे लेकर विपक्ष ही नहीं भाजपा के लोग भी पार्टी संगठन पर नजर गड़ाए हैं।
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