मेरठ। भाजपा के संगठन चुनाव में इस बार भी मतदान की बजाय मनोनयन से मंडल अध्यक्षों, महानगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों के चुनाव होंगे। आपसी गुटबाजी से बचने के लिए आमने-सामने के चुनाव की बजाय पार्टी मनोनयन का मार्ग अपनाएगी। इस कारण खुद को पदों पर काबिज कराने के लिए दावेदारों ने भागदौड़ तेज कर दी है।
भाजपा की बूथ समितियों का गठन लगभग पूरा हो चुका है। अब 15 दिसंबर तक मंडल अध्यक्षों के चुनाव संपन्न कराने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि 16 से 30 दिसंबर तक महानगर अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों के चुनाव संपन्न होंगे। मंडल अध्यक्ष के लिए पार्टी ने 35 से 45 वर्ष की आयु तय की गई है, जबकि जिलाध्यक्षों के लिए 45 से 60 वर्ष के बीच की आयु का मानक तय किया गया है। चुनाव के लिए भी पार्टी ने मतदान कराने की प्रक्रिया से किनारा कर लिया है और मुख्य पदों पर मनोनयन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सीधे चुनाव कराने से पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच गुटबाजी बढ़ेगी और आपसी सहयोग की भावना को नुकसान पहुंचेगा। लगभग एक दशक पहले भाजपा ने मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों के लिए सीधे चुनावी प्रक्रिया अपनाई थी। इससे भाजपा नेताओं के बीच गुटबाजी बढ़ गई थी। इससे काफी समय तक पार्टी नेताओं के बीच आपसी कटुता बनी रही। इसी कारण पार्टी ने मतदान की प्रक्रिया से परहेज किया है।