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भाजपा सांसद का गोद लिया गांव रह गया बेसहारा, ग्रामीणों का सपना टूटा

Wed, 28 Jun 2017 12:21 PM IST
अनुज मित्तल, मेरठ
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सांसद का गांव बदहाल
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भाजपा सांसद ने आदर्श गांव योजना के तहत एक गांव को गोद लिया था। सवाल है कि तीन साल बाद भी यह गांव मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के लिए तरस रहा है।
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भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल गांव भगवानपुर चट्टावन गांव में समस्याओं की चट्टान नहीं गिरा पाए। आदर्श गांव योजना के तहत सांसद ने किठौर विधानसभा क्षेत्र के इस गांव को गोद लिया था। लेकिन तीन साल बाद भी यह गांव मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के लिए तरस रहा है। अहम बात ये है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच से मुक्ति का अभियान भी इस गांव में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। गांव में न पीने का साफ पानी है, न ही तालाबों की सफाई हुई है। उज्ज्वला योजना से भी गांव के लोग वंचित रहे। 

ये थी आदर्श ग्राम योजना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार बनने के साथ ही प्रत्येक सांसद को हर साल एक-एक गांव गोद लेकर उसे आदर्श गांव बनाने का निर्देश दिया था। इसके लिए सांसद निधि के साथ ही सरकारी योजनाओं और सरकारी तंत्र के सहयोग से गांव को संतृप्त करते हुए आदर्श बनाने की बात कही गयी थी। 
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सरकारी योजनाओं से दूर 
ग्रामीणों के अनुसार उज्ज्वला योजना का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिला। नि:शुल्क गैस कनेक्शन के लिए बहुत आवेदन हुए। लेकिन किसी को कनेक्शन नहीं दिया गया। गांव में विद्युतीकरण तो हुआ। लेकिन बिजली मात्र 12-13 घंटे ही आ रही है। गांव में सबसे बड़ी समस्या जल निकासी की है, जिसका आज तक समाधान नहीं हुआ। नालियां छोटी हैं और टूट चुकी हैं तो आधे गांव में नालियां ही नहीं है। इसके अलावा जो गहरे नाले खोेदे गए थे, उनमें से एक नाला बंद हो चुका है और उसमें घास उग आयी है। जबकि दूसरा नाला मुख्य मार्ग के किनारे है, जिसके किनारे पर दीवार न होने से अक्सर दुघर्टनाएं होती रहती हैं। 

ये है भौगोलिक स्थिति 
मेरठ-गढ़मुक्तेश्वर मार्ग पर मेरठ से करीब 17 किमी दूर भगवानपुर  चट्टावन गांव ठाकुर बहुल है। जिसकी जनसंख्या करीब 3500 है। गांव के लोग मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं। लगभग प्रत्येक बिरादरी और वर्ग के लोग गांव में हैं। आज तक इस गांव में कभी कोई आपसी बड़े विवाद की घटना सामने नहीं आयी है। इस गांव में मुख्य मार्ग से जाने के दो रास्ते हैं। 

तालाब होते जा रहे खत्म 
भगवानपुर चट्टावन ऊंचाई पर बसा गांव है और इसके चारों तरफ कुल छह तालाब हैं। इनमें तीन तालाब जहां पूरी तरह सूखकर बंद हो चुके हैं और लोग कब्जा करते जा रहे हैं। बाकी तीन तालाबों की भी सफाई नहीं हुई है। जबकि आदर्श गांव योजना ही नहीं सरकारी योजना में भी तालाबों को पुनर्जीवित कर उनके सौंदर्यीकरण की योजना थी। इसके अलावा श्मशान घाट पर भी बहुत बड़ी जमीन है, लेकिन उसकी भी चारदीवारी न होने से कब्जा होने लगा है। 

सड़क-हैंडपंप ही खराब
ग्राम प्रधान अनिल कुमार का कहना हा कि सांसद ने विकास कार्य कराने के साथ अन्य काम भी कराए हैं। लेकिन चार सौ मीटर की एक सड़क बेहद खराब है और हैंडपंप भी ठीक नहीं हुए। हैंडपंप रिबोर का अधिकारी अब ग्राम पंचायत के पास आया है। शौचालय निर्माण में धांधली के आरोप गलत हैं।

समस्याएं बहुत हैं
पूर्व प्रधान विजय सिंह ने बताया कि पानी की टंकी मेरे कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी। जिसका अब निर्माण हो रहा है। शौचालय निर्माण में भारी धांधली हुई। गांव के बाहरी हिस्से मेें जल निकासी की व्यवस्था नहीं है।
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ग्रामीणों के सहयोग बगैर नहीं बन सकता आदर्श गांव

भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि शौचालय निर्माण में धांधली ग्राम प्रधान स्तर से है। वैसे हमने अब इसके नियम में बदलाव कराया है। शौचालय निर्माण का पैसा अब पंचायत नहीं बल्कि सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगा। लेकिन ग्रामीणों की इसकी शिकायत करनी चाहिए। तालाब सफाई का जिम्मा प्रधान का है, ग्रामीण उस पर दबाव बनाएं। उज्ज्वला योजना की पात्रता 2011 के सर्वे के आधार पर तय हुई है। इसलिए इस गांव के ग्रामीण इसमें वंचित रह गए होंगे। रही बात गांव को आदर्श बनाने की तो जब तक ग्रामीण और ग्राम पंचायत खुद अपने स्तर से पहल नहीं करेंगे, तब तक देश की कोई भी ग्राम पंचायत आदर्श नहीं बन सकती है। 

सांसद के प्रयासों से ये हुए काम 
ग्राम प्रधान अनिल कुमार के अनुसार सांसद ने 11 लाख रुपये की निधि से गांव में इंटरलॉकिंग के काम कराए। इसके अलावा गांव में विद्युतीकरण कराया। सिंडिकेट और आईडीबीआई बैंक की शाखाएं खुलवायी। इन्हीं बैंकों से गांव में 40 सोलर लाइटें भी लगवाई। दो प्राइमरी और एक जूनियर हाईस्कूल में फर्नीचर की व्यवस्था करायी। 

स्वास्थ्य व शिक्षा की व्यवस्था सही 
गांव में एक हेल्थ सेंटर है, जिस पर सप्ताह में दो दिन एएनएम आती हैं। इसके अलावा दो प्राइमरी और एक जूनियर हाईस्कूल के साथ दो पब्लिक स्कूल हैं। जबकि करीब एक किमी की दूरी पर मऊखास में इंटर कॉलेज है।

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