लोकसभा 2014 के परिणाम के अनुसार मुजफ्फरनगर सीट पर भाजपा और अन्य दलों के वोटों का अगर अंतर देखें तो भाजपा दो लाख वोटों से आगे नजर आती है, लेकिन उस चुनाव में भाजपा को इस सीट पर जाट वोटों के साथ दलित वोट भी मिला था, जो इस बार पूरी तरह कटा नजर आ रहा है। वहीं बिजनौर सीट पर भाजपा महागठबंधन से पचास हजार पीछे है, तो मेरठ सीट पर यह अंतर 22 हजार से ज्यादा है। जबकि बागपत सीट पर सवा लाख का अंतर बैठता है। सिर्फ गाजियाबाद सीट ऐसी है, जहां पर सारे विपक्षी दलों के मिले कुल वोट भी भाजपा से 2.87 लाख से कम बैठते हैं। दोनों लोकसभा चुनाव परिणाम देखने के बाद तय है कि यदि 2019 में भाजपा रालोद से गठबंधन करता है तो पश्चिम में उसकी राह आसान हो सकती है। लेकिन यदि अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरती है, तो उसके सामने इस बार राह आसान नहीं होगी।
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