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गठबंधन के सामने कई क्षेत्र बदलने की तैयारी में भाजपा, चेहरा चाहे बदल जाए, जाति का गणित वही रहेगा

Wed, 23 Jan 2019 12:54 PM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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बीजेपी
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भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 14 सीटों को लेकर जो मंथन चल रहा है, उसमें प्रत्याशियों का जातिगत गणित तो पुराना ही रखने की बात सामने आ रही है, लेकिन कुछ चेहरे बदल सकते हैं। ऐसे में तमाम दावेदार अपनी जाति की सीट पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। 

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भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी 14 सीटों पर जीत हासिल की थी। बागपत, मुजफ्फरनगर और बिजनौर सीट पर जाट, गाजियाबाद, मुरादाबाद और रामपुर में ठाकुर, अमरोहा और कैराना सीट पर गुर्जर, सहारनपुर और गौतमबुद्धनगर सीट पर ब्राह्मण, संभल से अति पिछड़ा, मेरठ सीट से वैश्य, नगीना और बुलंदशहर सुरक्षित सीट से अनुसूचित जाति के प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। पिछले चुनाव में सभी बड़े अंतर से सांसद निर्वाचित हुए थे। 

इन पांच सालों में कई सांसदों का रिपोर्ट कार्ड काफी खराब रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा शिकायतें जनता से दूरी बनाए रखने और सुनवाई न करने की रही हैं। इससे कहीं न कहीं पार्टी का प्रभाव भी कम हुआ। ऐसे में पार्टी नेतृत्व कुछ सांसदों को दोहराने के बजाय नए चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति बना रहा है। हालांकि जातीय गणित वही रखा जाएगा। जिस बिरादरी का सांसद निर्वाचित हुआ था, उसी बिरादरी के प्रभावशाली नेता को लोकसभा का दावेदार बनाया जाएगा।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जातिगत आंकड़ों पर जीती गई सीटों में बदलाव से नाराजगी पैदा करना ठीक नहीं होगा। क्योंकि इससे जिस जाति के प्रतिनिधित्व को समाप्त किया जायेगा, उसकी तो नाराजगी झेलनी ही पड़ेगी। इसके साथ दूसरी जाति के प्रत्याशी को उतारे जाने पर अन्य जातियों में कहीं न कहीं उपेक्षा की बात उठने पर नाराजगी पैदा हो सकती है। 
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गठबंधन के सामने कई क्षेत्र बदलने की तैयारी में 
सपा-बसपा गठबंधन में जल्द ही रालोद भी शामिल हो सकता है। ऐसे में बदलते समीकरण के कारण कुछ वर्तमान सांसद अपने लोकसभा क्षेत्र को बदलने की जुगत में हैं। इन 14 में से तीन सीटें ऐसी हैं, जहां सांसद सीट बदलकर लड़ना चाह रहे हैं।

सांसद बनने के इच्छुक विधायकों का जोश ठंडा 
लोकसभा चुनाव को लेकर कई विधायक एक माह पहले तक पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे थे। लेकिन जैसे ही गठबंधन पर मुहर लगी, इन विधायकों का उत्साह ठंडा पड़ गया। अब ये विधायक लोकसभा की दावेदारी से पीछे हट गए हैं।

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